- बिहार के युवक को थाईलैंड बुलाकर म्यांमार में साइबर ठगी गैंग को बेच दिया।
- भारत सरकार इस गैंग के लिए जबरन काम कर रहे 270 युवकों को छुड़ाकर लाई।
गोपालगंज/पटना |
देश के बाहर अच्छी नौकरी की तलाश ने बिहार के एक युवक को अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के गिरोह में फंसा दिया। अब विदेश मंत्रालय की मदद से वह युवक गोपालगंज के अपने गांव लौटा है तो उसकी कहानी सबको हैरान कर रही है।
गोपालगंज के भोरे गांव में रहने वाले प्रशांत कुमार पटेल ने बताया कि उसे और 300 से ज्यादा भारतीय युवकों को ‘अच्छी सैलरी’ का झांसा देकर थाईलैंड ले जाया गया, जहां से म्यांमार के साइबर गैंग को ‘बेच’ दिया गया, वहां अवैध साइबर कैंपों में उन्हें बंधक बनाकर रखा जाता था।
“3 लाख रुपये में मुझे बेच दिया”
घर लौटे प्रशांत ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि इस साल 12 सितंबर को, भोरे गांव के ही दो एजेंट (संजीव कुमार सिंह और राजीव कुमार सिंह) ने उसे थाईलैंड में अच्छी नौकरी का ऑफर दिया। 29 सितंबर को वह लखनऊ से बैंकॉक पहुंचा, जहां एक एजेंट ने उसे रिसीव किया।
प्रशांत ने बताया, “थोड़ी देर बाद मुझे एक अज्ञात स्थान पर कैद कर लिया गया और फिर कीचड़ व जंगलों के रास्ते म्यांमार ले जाया गया। वहां मुझे पता चला कि मुझे 3 लाख रुपये में बेच दिया गया है।”
म्यांयार में 2000 ‘साइबर गुलाम’
प्रशांत ने बताया कि उसे म्यांमार के म्यावाडी स्थित ‘केके पार्क’ में रखा गया था। वहां भारत, नेपाल, पाकिस्तान, नाइजीरिया और श्रीलंका जैसे कई देशों के लगभग 2000 लोगों को बंधक बनाकर रखा गया था। सभी को खराब भोजन, डर और कड़ी निगरानी में रखा जाता था।
‘AI’ से ‘लड़कियों’ की तस्वीर बनाकर ‘ठगी’
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भी इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ईओयू के मुताबिक, इन ‘साइबर गुलामों’ से जबरन साइबर ठगी कराई जाती थी।
1. कैसे होता था फ्रॉड: इन लोगों को हैक की गई फेसबुक आईडी पर AI से बनी ‘लड़कियों की फर्जी तस्वीरें’ लगाकर, अमेरिका और कनाडा के लोगों को फंसाने का काम दिया जाता था। वे इन विदेशी नागरिकों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर ठगते थे।
2. मना करने पर भारी ‘हर्जाना’: ईओयू ने बताया कि जब कोई यह काम करने से मना करता था, तो उससे हर्जाने के तौर पर 4 लाख रुपये की मांग की जाती थी।
म्यांमार आर्मी के ऐक्शन से मिली ‘आजादी’
म्यांमार में सत्ता कर रहे सैन्य शासन का दावा है कि उनके यहां चल रहे साइबर ठगी गैंग का निर्देशन चीन और पाकिस्तान से हो रहा था। 23 अक्तूबर को म्यांमार आर्मी ने इन साइबर कैंपों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की।
इस कार्रवाई से बचने के लिए प्रशांत समेत कई युवकों ने किसी तरह वहां से भागकर पड़ोसी थाईलैंड में शरण ली। थाईलैंड की सरकार की मदद से भारतीय विदेश मंत्रालय इन भारतीयों को स्वदेश लाया।
भारत सरकार ने ‘विशेष विमान’ से 270 को निकाला
थाईलैंड सरकार ने तुरंत भारतीय दूतावास को सूचना दी। 6 नवंबर को भारत सरकार ने आईएएफ के ‘विशेष विमान’ (C-130J) भेजकर 270 भारतीयों को वापस नई दिल्ली लाया।
बिहार के आठ युवक चंगुल में फंसे
नई दिल्ली में सभी से खुफिया एजेंसियों ने पूछताछ की, जिसके बाद ईओयू (Economic Offences Unit) की टीम बिहार के आठ 8 युवकों को पटना लेकर आई। यहां उनसे 13 नवंबर को दोबारा पूछताछ की गई और इसके आधार पर एजेंसी मानव तस्करी में शामिल सभी एजेंटों को ट्रेस करेगी।

