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America-Iran conflict : फिर ईरान के सामने आया अमेरिका, क्या बड़े हमले की आहट‍?

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली |

अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। गौरतलब है कि यह फारस की खाड़ी का संकीर्ण मुहाना है, जिसके जरिए दुनिया के व्यापारिक तेल के पांचवां हिस्से की आवाजाही होती है। यह मुहाना बंद होने से पूरी दुनिया का तेल व्यापार थमने से बड़ा संकट पैदा हो सकता है। 

फारस की खाड़ी के इस संकीर्ण मुहाने पर हुआ युद्धाभ्यास

ट्रंप बोले- 10 दिन में समझौता नहीं तो हमला होगा

वाशिंगटन डीसी में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में ट्रंप ने परमाणु कार्यक्रम पर ईरान से चल रही बातचीत को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा

“हमें एक ऐसा समझौता करना होगा जो सार्थक हो, नहीं तो बुरी चीजें होंगी। अगले दस दिन में या तो हम ईरान के साथ समझौते पर पहुंच जाएंगे या फिर ईरान के ऊपर सैन्य हमला होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (साभार इंटरनेट)

हाल के दिनों में अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है उधर स्विट्जरलैंड में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच बातचीत में प्रगति की भी खबरें आई हैं। डेमोक्रेटिक सांसदों और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने अमेरिकी संसद की मंजूरी के बिना ईरान में किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई का विरोध जताया है।

मध्यपूर्व में अमेरिकी युद्ध विमानों की गतिविधि बढ़ी (@DailyIranNews)

ईरान का जवाब- हम निर्णायक जवाब देंगे

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को गुरुवार(19 feb) को लिखे एक पत्र में ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अमेरिकी आक्रमकता का निर्णायक जवाब देंगे। उन्होंने कहा-
“ईरान युद्ध शुरू नहीं करेगा लेकिन किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का जवाब निर्णायक और समानुपातिक रूप से दिया जाएगा।”

ईरान सरकार के सर्वोच्च नेता व अन्य प्रमुख नेता। (फाइल फोटो, साभार विकिमीडिया)

क्या है दोनों देशों की तैयारियां?

ईरान के पास ‘मिसाइल सिटी’
  • ईरान ने सुरंग निर्माण और अंडरग्राउंड इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हुए उत्पादन, भंडारण और लॉन्च सिस्टम को जमीन के नीचे समाहित कर दिया है।
  • तथाकथित मिसाइल सिटी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में ईरान ने मिसाइल फार्म जैसी अवधारणाएं भी सामने रखी हैं।
  • ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाकर इस अहम मार्ग को बंद करने की कोशिश कर सकता है। बता दें कि यह प्रमुख व्यापार मार्ग है, जिसके बंद होने से अमेरिका समेत वैश्विक सामान की आवाजाही ब्लॉक हो सकती है।
अमेरिका के पास परमाणु विमान वाहक पोत
  • अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं।  
  • वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं।
  • पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
  • ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं।

ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का तनाव 

ईरान-अमेरिका के बीच तनाव दिसंबर 2025 में ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का कारण रहा है।
मध्य पूर्व में वर्चस्व चाहता है अमेरिका 
मध्य पूर्व में अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के जरिए वर्चस्व कायम रखना चाहता है, जिसमें उसे सबसे ज्यादा चुनौती ईरान से मिलती रही है। पिछले साल ईरान पर इजरायल ने कई मिसाइल हमले किए थे। अमेरिका दावा करता है कि ईरान तमाम प्रतिबंधों के बाद भी यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को जारी रखे है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं।

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