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यूपी के बरेली में फिर एनकाउंटर; पुलिस का दावा- ‘सेल्फ डिफेंस में फायरिंग से डकैत मरा’

बरेली में मुठभेड़ में मारा गया एक डकैट

बरेली में मुठभेड़ में मारा गया एक डकैट

बरेली |

उत्तर प्रदेश की बरेली से एक और एनकाउंटर की खबर है। गुरुवार सुबह नैनीताल रोड पर तीन थानों की पुलिस ने एक लाख के इनामी डकैत को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया।

पुलिस का कहना है कि इनपुट के आधार पर वे आरोपी को पकड़ने पहुंचे तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी जिसमेें एक कॉन्सटेबल को गोली लग गई है। पुलिस की सीमित जवाबी फायरिंग में डकैत को गोली लगी, अस्पताल पहुंचने पर उसे मरा हुआ (Brought dead) घोषित कर दिया गया।

 

बरेली हिंसा में दो आरोपियों का हाफ एनकाउंटर

बता दें कि हाल में ‘I love Muhammad’ को लेकर 26 सितंबर को हुई हिंसा के बाद बरेली पुलिस ने एक अक्तूबर को  दो आरोपियों को हाफ एनकाउंटर करके पकड़ा था, जिसमें उनके पैर में गोली मारी गई थी। 1 अक्टूबर को शाहजहांपुर के इदरीस (20 केस: चोरी, डकैती, गैंगस्टर एक्ट) और इकबाल (17 केस) को सीबीगंज में पुलिस ने गोलीबारी के बाद गिरफ्तार किया। दोनों को इलाज के बाद हिरासत में लिया गया।

 

7 जिलों में 19 मुकदमे, पुजारी की हत्या का आरोपी

पुलिस के मुताबिक, SOG और तीन थानों की संयुक्त टीम ने मुठभेड़ में एक लाख के इनामी डकैत शैतान उर्फ इफ्तेखार को 9 अक्तूबर की सुबह मार गिराया। डकैत के ऊपर 7 जिलों में 19 मुकदमे दर्ज हैं। वह थाना बिथरी चैनपुर थाने में डकैती की घटना में वांछित चल रहा था। 2006 में थाना फरीदपुर के पचौमी मंदिर के पुजारी की हत्या समेत डकैती में शामिल था। वर्ष 2012 में बाराबंकी जिले से पुलिस कस्टडी से फरार हुआ था। उसका एक साथी मौके से फरार हो गया।

 

UP में 207 एनकाउंटर, 25000 हाफ एनकाउंटर : रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश की पुलिस की अपराधियों के ऊपर एनकाउंटर कार्रवाइयां लगातार सामने आती रही हैं, जिनको लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई मीडिया रिपोर्ट्स में सवाल उठे हैं।

यूपी पुलिस की ऐसी कार्रवाइयां पहले भी उजागर हुई हैं, जिसे ‘ऑपरेशन लंगड़ा‘ भी कहा जाता है। पिछले सात साल में यूपी में 207 आरोपियों का एनकाउंटर और 25000 आरोपियों को कमर के नीचे के हिस्से में गोली मारकर हाफ एनकाउंटर किया गया है। ये जानकारी इस साल अगस्त में 101Reporters संस्था ने यूपी के ADG (कानून-व्यवस्था) के हवाले प्रकाशित की है।

इन कार्रवाइयों पर सवाल उठाने वाली रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि यूपी पुलिस की मुठभेड़ कार्रवाइयों की कहानी लगभग एक सी होती है, जिसमें ‘आरोपी बचने की कोशिश में गोली से मारा जाता है।’

 

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