- बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को ईमेल के जरिए इस्तीफा दिया।
- UGC के नए समता नियम व शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से बदसलूकी पर नाराजगी जतायी।
- योगी सरकार ने 2018 बैच के इस PCS अफसर के खिलाफ अनुशासनहीनता की जांच बैठाई।
नई दिल्ली|
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए समता नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया, इसके बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। द मिंट ने आधिकारिक सूत्रों के आधार पर दावा है कि यूपी सरकार ने इस अफसर के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी है और सोमवार की रात उन्हें सस्पेंड करके शामली जिलाधिकारी कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार की ओर से 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में OBC/SC/ST विद्यार्थियों के साथ होने वाले भेदभाव से निपटने के लिए नई समता गाइडलाइन जारी की हैं। इस नए नियम को काला कानून बताते हुए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार (26 jan) को इस्तीफा दे दिया।
शंकराचार्य से ‘बदसलूकी’ का भी मुद्दा उठाया
इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने एक पोस्टर लेकर अपना विरोध जताया, जिसमें लिखा है कि UGC अपना काला कानून वापस ले, साथ ही लिखा है कि माघ मेला के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और संतों के साथ हुए अपमान को नहीं सहा जाएगा। इस इस्तीफे ने यूपी में एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया।
बरेली मंडल के कमिश्नर करेंगे जांच
उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति अनुभाग-सात से विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि अग्निहोत्री ने प्रथम दृष्ट्या अनुशासनहीनता की है, जिसके कारण तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए बरेली मंडल के आयुक्त बीएस चौधरी को पदेन जांच अधिकारी नामित किया जाता है।
DM आवास में बंधक बनाने का दावा
26 जनवरी की शाम सिटी मजिस्ट्रेट डीएम आवास से बाहर निकले और उन्होंने स्थानीय मीडिया के सामने आरोप लगाया कि डीएम आवास में उन्हें 45 मिनट तक बंधक बनाए रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि डर व असुरक्षा के चलते उन्होंने अपना सरकारी आवास छोड़ दिया है। हालांकि बरेली जिलाधइकारी ने इस आरोप को खारिज किया है।
नए UGC नियम को समझिए
सभी विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान कराने के मकसद से यूजीसी ने हर हायर एजुकेशन संस्थान के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की हैं, जिसमें हर संस्थान को अपने यहां जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनने के लिए कमेटी बनानी होगी और उसका समाधान करना होगा ताकि सभी जाति के विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर मिलें। इस मामले में सवर्ण जाति के कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि नए नियम से उनके खिलाफ झूठी शिकायतें होने लगेंगी और उनसे भेदभाव बढ़ जाएगा, कुछ ऐसा ही स्टैंड बरेली पीसीएस अफसर का है और इसी को लेकर उन्होंने इस्तीफा दिया।


