- बुजुर्ग महिला गंभीर स्थिति में इलाज के लिए आई थी, डॉक्टरों पर ऑक्सीजन मास्क हटाकर चले जाने का आरोप।
बेतिया | मनोज कुमार
बिहार के सरकारी अस्पताल में एक मरीज का ऑक्सीजन मास्क हटाने और इस बारे में पूरी जानकारी परिजन को न देने को लेकर हंगामा हो गया। घटना के तुरंत बाद महिला की मौत हो गई तो परिजनों ने हंगामा किया, जिस पर जूनियर डॉक्टर व इंटर्न ने उन्हें पीटा। इस घटना का एक वीडियो वायरल होने के बाद मेडिकल स्टाफ की संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला रेफर होकर आई थी और उसकी हालत पहले ही खराब थी, मारपीट की घटना से भी अस्पताल प्रशासन ने इनकार किया है।
पटना से गंभीर हालत में GMCH लायी गई महिला
यह पूरा मामला पश्चिम चंपारण के सरकारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) का है, जहां पहले भी जूनियर डॉक्टरों के तीमारदारों के साथ झगड़े की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा मामला 21 जनवरी की रात का है। पटना के क्रिश्चियन क्वार्टर निवासी सुशीला देवी (60) को उनके परिजन इलाज के लिए पटना से बेतिया ला रहे थे। रास्ते में मोतिहारी के पास उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें सीधे जीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे। यहां भर्ती के कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई।
‘ऑक्सीजन मास्क हटाकर डॉक्टर चला गया, पत्नी की तुरंत मौत हो गई’
मृतका के पति ज्ञानप्रकाश हेनरी ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में मौजूद एक डॉक्टर ने उनकी पत्नी के मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटा दिया और फिर वे दूसरे डॉक्टर से बातचीत करने लगे। इसी दौरान उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और कुछ ही देर में मौत हो गई। इस पर डॉक्टर से उनके दो बेटों ने पूछा कि उन्होंने ऑक्सीजन मास्क क्यों हटाया था? बस यही से झगड़ा शुरू हो गया।
‘ऑक्सीजन हटाने पर सवाल किया तो गुंडों की तरह पीटा’
मृतका के पति के मुताबिक, कुछ देर बाद दर्जनों जूनियर डॉक्टर और इंटर्न छात्र एक साथ पहुंचे और दोनों भाइयों की जमकर पिटाई कर दी। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि 10-12 मेडिकल स्टाफ ने लात-घूंसे और जूतों से परिजनों को बुरी तरह पीटा। पिटाई इतनी बेरहमी से की गई कि परिजन जमीन पर गिर गए।
मृतका के पति ज्ञानप्रकाश ने मीडिया से कहा-
“मेरा बेटा सिर्फ इतना पूछ रहा था कि मां का ऑक्सीजन मास्क क्यों हटाया? उसी पर अस्पताल वालों ने गुंडों की तरह पिटाई की। हम इलाज कराने आए थे या मार खाने?”
मारपीट से घबराए दूसरे तीमारदार भागे
हंगामे के कारण इमरजेंसी वार्ड में भर्ती अन्य गंभीर मरीजों और उनके परिजनों के बीच दहशत फैल गई और कई लोग वार्ड छोड़कर बाहर निकल गए।घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल नाका प्रभारी मदन कुमार मांझी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और हालात को काबू किया।
अस्पताल अधीक्षक बोलीं- ‘महिला की मौत हो चुकी थी’
वहीं, अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधा भारती ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला को जब अस्पताल लाया गया था, तब उनकी मौत हो चुकी थी, हमारे डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके बावजूद परिजन इलाज के लिए दबाव बना रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि –
“मृतका की स्थिति समझाने के लिए ऑक्सीजन मास्क हटाया गया, जिस पर परिजन उग्र हो गए और गाली-गलौज व मारपीट करने लगे। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ और जूनियर डॉक्टर भी आक्रोशित हो गए। अगर किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत मिलती है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
क्या बोली पुलिस ?
अस्पताल नाका प्रभारी मदन कुमार मांझी का कहना है कि इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष ने थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने बताया कि हंगामा शांत होने के बाद मृतका के परिजन शव को लेकर अपने घर चले गए।