सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में सहरसा जिले के सिहोल गांव के मजदूर परिवार का बेटा आदर्श कुमार ने आर्ट्स स्ट्रीम में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।
यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि आदर्श ने पूरी पढ़ाई अभाव भरे जीवन में सरकारी स्कूल से की है। उसने बिना ट्यूशन के गांव में रहकर ही इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।
आदर्श के पिता रंजीत कुमार झा हरियाणा के सोनीपत में मजदूरी करते हैं। वे परिवार का भरण-पोषण इसी कमाई से करते हैं।
आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 5 तक) दिल्ली में हुई, लेकिन बाद में पूरा परिवार गांव लौट आया।
यहां से आदर्श ने दुर्गा उच्च विद्यालय में मैट्रिक और इंटरमीडिएट (आर्ट्स) की पढ़ाई पूरी की। आदर्श बचपन से ही पढ़ाई में तेज और मेहनती रहा है।
उसकी मां बंटी देवी बताती हैं कि वह अक्सर कहता था, “पढ़कर हम शिक्षक बनेंगे।” परिवार में दो भाई हैं और आदर्श सबसे छोटा है।
बड़े भाई शिवम झा ने कहा, “हमारे लिए यह गर्व की बात है कि छोटा भाई इतना आगे बढ़ा। उसकी सफलता से पूरा गांव खुश है।”आदर्श ने कभी कोचिंग या ट्यूशन नहीं लिया।
न तो कोई प्राइवेट स्कूल की सुविधा थी और न ही आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति।
फिर भी उसने सिर्फ स्कूल की किताबों और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया।
पूरे गांव में आज खुशी का माहौल है। लोग इसे “गांव की शान” कह रहे हैं।
यह सफलता उन लाखों ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी में भी बड़े सपने देखते हैं।
आदर्श की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

