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बिहार : गरीबों को पक्का मकान देने की योजना चुनावी साल में बनी चुनौती

बिहार के एक गांव का दृश्य (फोटो क्रेडिट - Flickr)

बिहार के एक गांव का दृश्य (फोटो क्रेडिट - Flickr)

(अररिया-मुंगेर से इनपुट के साथ) नई दिल्ली |
गरीबों के पक्के मकान का सपना पूरा करने का वादा बिहार सरकार के लिए चुनावी साल में चुनौती बन गया है। सरकार को पीएम आवास योजना 1.0 के स्वीकृत मकानों को दिसंबर-2025 तक बनाकर देना है जिनमें से अभी एक लाख मकानोें का निर्माण लटका हुआ है। दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों में पक्के मकान बनाकर देने की योजना तेज गति से चल रही है पर इसमें भी भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जो सरकार के लिए सरदर्दी बने हुए हैं। बीते बुधवार को अररिया में एक ग्रामीण आवास सहायक की सेवा समाप्त कर दी गई क्योंकि उसने दो ग्राम पंचायतों के लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए दूसरी किश्त ही जारी नहीं की। गौरतलब है कि बिहार में गरीबों को पक्का मकान मिलना एक बड़े वोटर वर्ग को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में NDA सरकार अपने ‘विकास के वादे’ को समय से पूरा करने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहेगी।
शहरी क्षेत्र : पहले चरण के मकान अब तक लटके, 2.0 योजना शुरू हो गई
बिहार के शहर में रहने वाले गरीबों को पक्का मकान देने की योजना काफी धीमी गति से चल रही है। PMAY-U 1.0 के तहत 50% से कम पूर्णता दर है। यानी पहले चरण में जितने मकान बनाने के लिए स्वीकृत हुए थे, उनसे आधे ही तैयार हो पाए हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार, इस योजना के पहले चरण के अंतर्गत प्रदेश में अब तक कुल 264604 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 156550 आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यानी अभी 108,054 मकानों का निर्माण बाकी हैं। शहरी क्षेत्र में इस देरी के चलते आवास बनाने की डेडलाइन को Dec-2025 कर दिया गया है पर 22 नवंबर से पहले ही राज्य में चुनाव होने हैं, ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौती बन गया है। 
पीएम आवास-शहरी योजना 2.0 शुरू हो गईवित्तीय वर्ष 2024-25 में PMAY-U 2.0 के पहले चरण के लिए 100124 लाभुकों के घरों का निर्माण होना है, इसके लिए केंद्र सरकार ने बीती 20 फरवरी को ही स्वीकृति दे दी है। अब इसने निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है पर सरकार को पहले चरण की योजना वाले मकानों की यूनिट का बैकलॉग भी पूरा करना होगा, जिसकी अधिकतम समय सीमा इस साल के अंत तक है। बता दें कि दूसरे चरण की योजना 2029 तक चलेगी।
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:: ग्रामीण क्षेत्र की पीएम आवास योजना में उजागर हो रहा भ्रष्टाचार

बिहार की आबादी का लगभग 26.59% बहुआयामी गरीबी है, नीति आयोग(2022-23) की रिपोर्ट के अनुसार। तस्वीर- इंटरनेट 

 

1- अररिया : 485 लाभुकों में से 259 को दूसरी किश्त नहीं भेजी 

अररिया | जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में व्यापक पैमाने पर धांधली के मामले सामने आ रहे हैं। डीडीसी रोजी कुमारी ने एक ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव की सेवा 24 सितंबर को समाप्त कर दी जिसने बड़ी संख्या में लाभार्थियों की किश्त दबा ली थी।

मामला रानीगंज प्रखंड के खरहट और नन्दनपुर ग्राम पंचायतों में पीएम आवास योजना की जिम्मेदारी संभाल रहे ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव से जुड़ा है। रानीगंड बीडीओ की जांच में पता लगा कि आवास सहायक गौरव ने 485 ग्रामीण लाभुकों (beneficiary) को पहली किश्त का भुगतान किया था पर दूसरी किश्त सिर्फ 226 लाभुकों को भेजी गई। इस मामले पर जवाबतलब करने पर आरोपी ने जवाब नहीं दिया। साथ ही 22 सितंबर को DRDA कार्यालय पहुंचकर कथिततौर पर नशे में हंगामा करते हुए कर्मचारियों से भिड़ गए।

SC/ST कोटे के लाभुकों को मकान नहीं दिया – इसी जिले में एक अन्य मामला एससी-एसटी कोटे के लाभुकों को पीएम आवास योजना का लाभ न मिलने को लेकर सामने आया है। DDC को शिकायत मिली कि आवास योजना में अति पिछड़े व आदिवासी समुदाय के लोगों को जानबूझकर योजना से वंचित रखा गया, शिकायत पर डीडीसी ने जांच शुरू करा दी है।

लापरवाही करने पर सैलरी काटी – इससे पहले 27 अगस्त को अररिया में दस आवास सहायकों पर कार्रवाई हो चुकी है। डीडीसी स्तर से उनके मानदेय से दस फीसद कटौती एक साल तक करने का आदेश दिया था ।उससे पहले दो आवास पर्यवेक्षक से भी 25 फीसद कटौती के आदेश हुए थे। लेकिन फील्ड में काम करने वाले स्टाफ के कार्य प्रणाली में सुधार होता नहीं दिख रहा है।

2- पटना : मकान दिलाने के नाम पर वसूली, नौकरी गई

बीते अप्रैल में मसौढ़ी प्रखंड के भैंसवा पंचायत में कार्यरत आवास सहायक रागिनी कुमारी पर लाभुकों से 2-2 हजार रुपये वसूली का आरोप लगा, जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।

3- वैशाली : 60 ग्रामीणों से दो-दो हजार वसूले  

इस साल जनवरी में ओस्ती हरपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 में पंचायत आवास सहायक रामप्रवेश प्रताप को ग्रामीणों ने अवैध वसूली करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी आवास सहायक पंचायत में कम से कम 60 लोगों से आवास योजना में मकान दिलवाने के नाम पर दो-ढाई हजार रुपये वसूली कर रहा था। इस पर अधिकारियों ने कहा था कि शिकायत आने पर जांच करेंगे।

4- मुंगेर : जिन्हें ग्रामीण योजना में लाभ मिला, उन्हीं को शहरी में भी मकान दे दिया

यहां की संग्रामपुर नगर पंचायत के तहत जिन्हें पीएम आवास योजना-शहरी के तहत पक्के मकान का लाभ दिया गया है, उन्हें पहले पीएम आवास-ग्रामीण योजना के तहत मकान दिया जा चुका था। ये मामला इसी महीने के पहले सप्ताह में प्रकाश में आया जिसकी जांच की जा रही है। दरअसल, संग्रामपुर नगर पंचायत का गठन लगभग तीन साल पहले कुसमार और झिकुली पंचायत को विघटित करके किया गया था। इसमें कुसमार पंचायत का पूरा हिस्सा व झिकुली पंचायत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। इन पंचायतों में जिन लोगों को पीएम आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिला था, उन्हीं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नई योजना में भी मकान हथिया लिए। इस मामले की जांच चल रही है।

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मकान एलॉटमेंट और किश्त में देरी पर लगता है जुर्माना फिर भी देरी 

बिहार मेें किश्त जारी करने में देरी व लापरवाही के मामले तब सामने आ रहे हैं जबकि इसको लेकर केंद्र जुर्माना लगाता है। 2022 से केंद्र सरकार किसी आवास की स्वीकृति में एक महीने से ज्यादा की देरी होने पर प्रति आवास 10 रुपये की कटौती करता है। साथ ही, अगर स्वीकृति मेें दो महीने की देरी हुई तो 20 रुपये प्रति आवास की दर से राशि कटौती होती है। इसके अलावा, लाभुकों को पहली किश्त की राशि देने में एक सप्ताह से अधिक की देरी करने पर 10 रुपये प्रति आवास हर सप्ताह की दर से राशि की कटौती की जाएगी।

कैग रिपोर्ट ने बिहार में मकान के बदले रिश्वत की पोल खोली

कैग रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में लगभग ₹450 करोड़ के फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आए, जिसके लिए 2023 में 5 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई सीमित रही। मुख्य रूप से मकान की स्वीकृति, किश्त जारी करने और निर्माण सामग्री में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ।

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इस साल के अंत तक शहरी गरीबों को मकान बनाकर देना सीएम नीतीश के लिए चुनौती। (साभार- इंटरनेट)

 

चुनावी साल में सरकार ने 13.5 लाख नए मकान केंद्र से मांगे 
बिहार के ग्रामीण विकास विभाग (RDD) ने पिछले साल अगस्त में जानकारी दी कि PMAY-G के तहत बैकलॉग क्लियर करने के बाद 13.5 लाख नई यूनिट्स की मांग की केंद्र से की गई है। बिहार सरकार के मुताबिक, 2016 से 2024 तक 37 लाख स्वीकृत यूनिट्स में से 36.64 लाख का निर्माण हो चुका है, जिस पर ₹45,049.17 करोड़ खर्च हुए। 98.94% बैकलॉग क्लियर होने के बाद RDD विभाग ने केंद्र को अनुरोध भेजा है। गौरतलब है कि 2018-19, 2022-23 और 2023-24 में केंद्र सरकार ने बिहार को ग्रामीण क्षेत्र के लिए नये आवास अलॉट करने के लिए टारगेट नहीं दिए थे।
बता दें कि हर लाभार्थी को पक्का मकान बनाने के लिए ₹1.30 लाख सब्सिडी मिलती है, जबकि भूमिहीनों को जमीन खरीदने के लिए ₹1 लाख (पहले ₹60,000) रूपये दिए जाते हैं।
चुनावी साल में लक्ष्य पूरा करने के प्रयास तेज
2025 में ग्रामीण विकास विभाग (RDD) ने “Angikaar 2025” कैंपेन शुरू किया, जिसमें मोबाइल वैन और QR-कोड गाइड से योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। साथ ही विभाग ने “निगरानी अभियान” शुरू किया ताकि योजना में भ्रष्टाचार को रोका जा सके। हालांकि इसके तहत अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

बिहार सरकार की घोषणा- अविवाहित वयस्क को पीएम आवास

इस साल जुलाई में राज्य सरकार ने घोषणा की कि अविवाहित वयस्क को भी एकल परिवार मानते हुए इस योजना के तहत पक्का मकान मिल सकता है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देश के अनुसार, पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे परिवार हैं जबकि ऐसे अविवाहित वयस्क जिनके माता-पिता जीवित नहीं हैं, उन्हें भी एकल परिवार माना जाएगा।

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बड़े वोटवैंक को साध सकता है पक्का मकान 

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🏠 पीएम आवास योजना (बिहार) : टाइमलाइन व प्रमुख घटनाएँ

📌 2016–2022

📌 मार्च 2023

📌 अगस्त 2023

📌 सितंबर 2023

📌 अप्रैल 2024

📌 जनवरी 2024

📌 2024 (पहला सप्ताह)

📌 अगस्त 2024

📌 जुलाई 2025

📌 फरवरी 2025

📌 2025 (चुनावी साल)

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