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बिहार : कड़ाके की ठंड में शुरू हुई कांवड़ यात्रा, देवघर के लिए मिथिलांचल से निकले कावंड़िये

मौनी अमावस्या के दिन मिथिलांचल के कांवड़िये देवघर के लिए जल भरकर निकले हैं।

मौनी अमावस्या के दिन मिथिलांचल के कांवड़िये देवघर के लिए जल भरकर निकले हैं।

भागलपुर |

सावन में कांवड़ियों (Kanwariya) के गंगाजल लाकर शिव मंदिर में अर्पित करने के बारे में तो आप जानते ही होंगे, पर बिहार में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) शुरू हो चुकी है। इसमें मिथिलांचल के शिव भक्त झारखंड के देवघर के लिए कांवड़ लेकर निकले हैं। मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के मौके पर इस खास कांवड़ यात्रा की शुरूआत हुई है।

इस कांवड़ यात्रा की खास बात यह रही कि पूरे जत्थे में कहीं भी डीजे की मौजूदगी नहीं देखी गई, जो हाल के वर्षों में कांवड़ यात्रा का हिस्सा बन चुकी है और इसके चलते कई अप्रिय घटनाएं सामने आती रही हैं।

इन भक्तों को कहते हैं- कमरथुआ कांवरियां

भागलपुर के कच्ची कांवरिया पथ और सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग पर रविवार (18 जनवरी) को कांवरियों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पैदल देवघर (Deoghar) की यात्रा पर निकले इन शिवभक्तों को कमरथुआ कांवरिया (Kamrathua Kanwariya) कहा जाता है। ये कांवरिये बांस की कांवर लेकर, सिर पर पारंपरिक ‘पाग’ धारण किए पैदल आगे बढ़ रहते रहे। कड़ाके की ठंड के बावजूद कांवरिये सड़क किनारे ही भोजन बनाते और विश्राम करते दिखाई दिए।

क्या है मान्यता

दरअसल मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करके शिवभक्त सुल्तानगंज के अजगैविनाथ धाम से गंगाजल भरते हैं। फिर वे लंबी कांवड़ यात्रा करके देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करते हैं। शिवभक्त कहते हैं कि इससे उनकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं। बता दें कि वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर झारखंड के देवघर में स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है जो शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से एक है।

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