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बिहार पुलिस ने शराबबंदी में एक आदमी को पकड़ा, जेल में मौत

अरवल | आजाद खान

मछली पकड़ने का काम करके अपना घर चलाने वाले एक आदमी को उत्पाद पुलिस शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया, तीन दिन के बाद आरोपी की जेल में मौत हो गई। मृतक की पत्नी का कहना है कि उनका पति थोड़ी-बहुत शराब पीते थे पर शराब कभी नहीं बेची, पुलिस ने पैसे के लालच में फंसाकर जेल भेजा।

पति की पुलिस हिरासत में मौत की जानकारी महिला

अरवल में उत्पाद विभाग ने सकरी पंचायत के मदन सिंह टोला में बीते सोमवार को छापामारी की थी। इस दौरान वह 30 साल के प्रमोद चौधरी (पिता मुखलाल चौधरी) को गिरफ्तार करके ले गई। मृतक की पत्नी फुलवंती ने बताया कि बुधवार को उनके पास फोन आया था कि उनके पति सदर अस्पताल में भर्ती हैं। वे पूरे अस्पताल में भटकती रहीं पर पति नहीं मिले और उनकी अकड़ी हुई लाश बाद में मोरर्ची में रखी हुई थी।

20 हजार रुपये नहीं दिए तो जेल भेज दिया

मृतक प्रमोद की पत्नी फुलवंती का कहना है कि उनके घर आठ सितंबर को पुलिस आई और पति को शराब बेचने के आरोप में पकड़कर ले जाने लगी। उनका आरोप है कि सादी वर्दी वाले लोगों (उत्पाद पुलिस) से जब उन्होंने पति को छोड़ने की गुहार लगाई तो उनमें से एक व्यक्ति ने उनसे 20 हजार रुपये मांगे। फुलवंती का कहना है कि उनके पास इतने रुपये नहीं थे तो पुलिस पति को अपने साथ ले गई। महिला ने बताया कि वे अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों को लेकर दो दिन थाने दौड़ती रहीं पर पति को नहीं छोड़ा। तीसरे दिन 11 सितंबर को उनके पास पुलिस का फोन आया कि ‘अस्पताल आकर अपने पति की सेवा करो।’  अस्पताल में काफी भागदौड़ के बाद उन्हें पता लगा कि पति की तो मौत हो चुकी है।

आक्रोशित ग्रामीणों राष्ट्रीय राज्य मार्ग घेरा 

पुलिस हिरासत में मौत से आक्रोशित प्रमोद की पत्नी फुलवंती समेत तीस ग्रामीणों ने जहानाबाद पहुंचकर एनएच 139 जाम कर दिया। जाम लगता देखकर पुलिस ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर लाठी चार्ज कर दिया जिसमें 28 महिलाएं और 2 पुरुष घायल हो गए। मृतक की पत्नी फुलवंती देवी के दो बेटे और तीन बेटियां हैं और एक बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ बताई जा रही है। ग्रामीणों ने फुलवंती की माली हालत का हवाला देते हुए प्रशासन से दस लाख रुपये मुआवजे की मांग की। इस मौके पर विधायक महानंद सिंह, जिला सचिव जितेंद्र यादव आदि प्रमुख नेता पहुंचे। विधायक ने पुलिस अफसरों से स्थानीय लोगों की बात करवाई, आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने जाम हटाया।

गरीबों को शराब में फंसा रही पुलिस, हिरासत में मौत मर्डर है- विधायक 

विधायक महानंद सिंह ने इस मामले में कहा कि जदयू- भाजपा की सरकार में गरीबों को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है। पुलिस हिरासत में एक गरीब की मौत होना मर्डर है, अगर किसी की शराब पीने की आदत हो गई है तो उसे इस आधार पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। पुलिस की आदत है कि जो पैसा दे देता है, उसे छोड़ देती है और रिश्वत न दे पाने वाला गरीब जेलों में सड़ता रहता है। बिहार की जेलों में बंद अधिकांश लोग गलत केसों में बंद हैं और सभी गरीब तबके के हैं।

बिहार में हिरासत में मौत के स्थिति गंभीर

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम “Prison Statistics India 2022” रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में जेलों में कस्टोडियल डेथ्स (हिरासत में मौतें) चिंता का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्ट में राज्य-विशिष्ट आंकड़ों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन राष्ट्रीय डेटा के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि बिहार में साल 2022 में लगभग 150-200 मौतें हुईं, जिनमें ज्यादातर प्राकृतिक कारणों (बीमारी, उम्र) से जुड़ी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर 1,000 से अधिक प्राकृतिक और 159 अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं, जिसमें बिहार का हिस्सा महत्वपूर्ण रहा। इस मामले में सटीक आंकड़ों के लिए NCRB की नवीनतम रिपोर्ट (2023-2025) का इंतजार करना होगा, जो अभी जारी नहीं हुई है।
बिहार की जेलों में क्षमता से 130% ज्यादा कैदी 
बिहार की जेलों में क्षमता 47,750 कैदियों की है, लेकिन ओवरक्राउडिंग (130% से अधिक) और मेडिकल सुविधाओं की कमी ने मौतों की दर को बढ़ाया है।
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