- सासाराम में शब-ए-बारात के मौके पर लगता है दो दिवसीय उर्स मेला।
- चंदन शहीद पीर पहाड़ी पर 800 से अधिक वर्षों से लग रहा है मेला।
- मुस्लिम ही नहीं हिन्दू श्रद्धालु भी इस उर्स में शामिल होने पहुंचते हैं।
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
बिहार के सासाराम में शब-ए-बारात के मौके पर लगने वाले ऐतिहासिक उर्स मेले की शुरूआत हो गई है, जिसमें मुस्लिम ही नहीं हिन्दू समुदाय के श्रद्धालु भी भाग लेने पहुंच रहे हैं। सासाराम शहर के पूर्वी छोर पर स्थित चंदन शहीद पीर पहाड़ी पर यह उर्स मेला लगा है।
इस पहाड़ी को हजरत चंदन शहीद पीर रहमतुल्लाह के नाम से जाना जाता है, और इन्हीं पीर की याद में पिछले 800 साल से उर्स मेला लगता हर साल लगता है। इस साल 815वां उर्स मनाया जा रहा है।
खास बात यह भी है कि इस उर्स में शामिल होने के लिए आने वाले जायरीन सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी के मकबरे को भी देखने जाते हैं जो इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का अनूठा नमूना है।
इस उर्स मेले में शामिल होने के लिए बिहार के अलावा झारखंड, बंगाल व यूपी से बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं। चंदन शहीद पीर कमिटी ने बताया कि दूर-दूर से आए ज़ायरीन चादरपोशी करके मन्नतें मांगते हैं।साथ ही, गुलपोशी, कुरानखानी और मजार की इत्र से गुसुल रस्म के साथ साथ लोग फातिया पढ़ते हैं।
प्रशासन ने उर्स के चलते जिले में ट्रैफिक की समस्या हल करने के लिए नया ट्रैफिक रूट बनाया है। पुलिस उपाधीक्षक यातायात ने बताया कि उर्स क्षेत्र में तीन पहिया व चार पहिया वाहनों की एंट्री पर रोक है। साथ ही, सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। उर्स मेले के लिए पहाड़ी के नीचे दुकानें सज गई हैं जिसमें स्थानीय व बाहर से आए श्रद्धालु खरीदारी करते देखे जा सकते हैं।

