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30 मार्च को इस्तीफा दे सकते हैं CM नीतीश कुमार, ‘समृद्धि यात्रा’ से पूरा हुआ उत्तराधिकारी का संदेश

पटना में बिहार दिवस कार्यक्रम के दौरान सीएम नीतीश कुमार (तस्वीर - FB/nitishkumarjdu)

नई दिल्ली |

बिहार की राजनीति में आने वाले 48 घंटे बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को अपने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की सदस्यता बचा सकते हैं। ऐसा हुआ तो बिहार में दो दशक से जारी नीतीश कुमार का युग 30 मार्च को खत्म हो सकता है।

हाल में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियम के मुताबिक उन्हें 14 दिनों के अंदर उन्हें बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी। वरना उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। यह अवधि 30 मार्च को पूरी हो रही है। मुख्यमंत्री का इस्तीफा होते ही पूरी कैबिनेट का इस्तीफा माना जाता है, ऐसे में नए सिरे से नई NDA सरकार का गठन होगा।

नीतीश के तीस मार्च को पद छोड़ने की अटकलों को इसलिए भी बल मिल गया है क्योंकि बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार ने 27 मार्च को बयान देते हुए कहा कि 30 मार्च तक सीएम नीतीश कुमार के पास इस्तीफा देने का समय है। गौरतलब है कि नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल में पहली बार विधानसभा स्पीकर का पद जदयू की जगह भाजपा के पास है।

समृद्धि यात्रा के दौरान सम्राट के कंधे पर सीएम नीतीश कुमार का हाथ और सम्राट के अभिवादन करने की तस्वीरों के राजनीतिक मायने हैं।

उधर, 26 मार्च को सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा समाप्त हो गई, जिसके तहत उन्होंने पूरे राज्य का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान कई जिलों में मंच से उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को लेकर संकेत देते हुए कहा- ‘अब आगे ये ही सब देखेंगे।’ समृद्धि यात्रा के दौरान वे कई मौकों पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखे नज़र आए। जबकि बिहार के दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की भी मौजूदगी थी।

जानकार बताते हैं कि समृद्धि यात्रा का शेड्यूल इस हिसाब से रखा गया है कि नीतीश कुमार बिहार की जनता से मिलकर समय से अपना संदेश पहुंचा दें और 30 मार्च से पहले वे इस जिम्मेदारी से निपट जाएं।

सम्राट चौधरी को बिहार में भाजपा का प्रमुख नेता माना जाता है। वे NDA की सरकार में दूसरी बार डिप्टी सीएम बनाए गए हैं और गृहमंत्री भी हैं। उन्हें मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि बिहार की राजनीति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि कई भाजपा के वरिष्ठ नेता नहीं चाहते कि सम्राट को नया सीएम बनाया जाए।

फाइल फोटो।

वोट बैंक के समीकरण की नजर से देखें तो  नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी को सबसे उपयुक्त सीएम दावेदार इसलिए माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुर्मी (लव) समाज से आते हैं और सम्राट कोइरी (कुश) समाज से। दोनों जातियों का गठबंधन बिहार में एक मजबूत राजनीतिक ब्लॉक है जो करीब 7% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में माना जा रहा है कि सत्ता का लव से कुश की ओर ट्रांसफर होना जदयू के वोटरों को नाराज़ नहीं करेगा, लव-कुश की एकजुटता बनी रहेगी।

जदयू में कई नेता उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में जदयू चाहती है कि नीतीश कुमार इस्तीफे की डेडलाइन तक मुख्यमंत्री पद डटे रहें ताकि नई सरकार में जदयू इस बात के लिए भाजपा पर दवाब डाल सके कि नई सरकार में उसे भी बड़ी जिम्मेदारी मिले।

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