पटना | हमारे संवाददाता
बिहार में दसवीं बार सीएम पद की शपथ लेने के दो महीने से कम समय बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यव्यापी यात्रा शुरू कर दी है, जिसे समृद्धि यात्रा नाम दिया गया है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जबकि विपक्षी नेता तेजस्वी यादव राजनीतिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आ रहे और वे खुद कह चुके हैं कि वे नई सरकार के सौ दिन पूरे होने तक कुछ नहीं बोलेंगे। वहीं, NDA के सहयोगी दल BJP के दो बड़े नेता व डिप्टी सीएम की राज्य में अति सक्रियता देखने को मिल रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस यात्रा का उद्देश्य जमीनी स्तर पर योजनाओं की समीक्षा करना बताया गया है। पर हाल में घटी बड़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर सीएम की चुप्पी और उनके अनिश्चित स्वास्थ्य के चलते मीडिया से बनाई गई दूरी के चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस यात्रा से सीएम बिहार की जनता की नब्ज टटोल पाएंगे? हालांकि यह भी नहीं भूलना चाहिए कि बतौर सीएम यह नीतीश कुमार की 16वीं राज्यव्यापी यात्रा है। यह भी गौरतलब है कि बेतिया से शुरू हुई उनकी समृद्धि यात्रा से ठीक पहले विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। यह दर्शाता है कि राज्य की मिशीनरी उनकी छवि को लेकर कितनी सजग है।
16 जनवरी के शुरू हुई यात्रा में अब तक क्या-क्या हुआ?
16 जनवरी को पश्चिमी चंपारण के बेतिया से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा की शुरुआत हुई। जिसमें मुख्यमंत्री ने 153 करोड़ रुपये की लागत से 125 नई योजनाओं का शुभारंभ किया। इन योजनाओं में महिला सशक्तिकरण, युवा विकास, कौशल प्रशिक्षण और जन-जन को समृद्ध बनाने से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
ऐलान – सरकारी डॉक्टर नहीं कर पाएंगे निजी प्रैक्टिस: वहीं, मुख्यमंत्री ने पहले दिन बड़ा ऐलान किया कि बिहार के सरकारी डॉक्टर्स अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। सरकार इसके लिए नई नीति लाने जा रही है।
किसानों पर भी खास फोकस : इस यात्रा में किसानों पर भी खास फोकस है। किसानों को मजबूत बनाने के लिए विशेष कृषि मेले और कृषि यंत्रीकरण की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। मुख्यमंत्री चंपारण में बन रहे कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र का भी भ्रमण किया। इससे क्षेत्र में रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
यात्रा से ठीक पहले माले नेता को उठाया
पश्चिम चंपारण में भाकपा (माले) के युवा नेता और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन के राज्य नेता फरहान राजा की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 16 जनवरी को शुरू हुई समृद्धि यात्रा से ठीक पहले हुई।
भाकपा (माले) राज्य कमिटी के सचिव कुणाल ने कहा कि फरहान राजा को बेतिया क्षेत्र में गरीब जनता के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने और सरकारी अस्पतालों की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने के कारण गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के बुनियादी सवालों से बचने और आवाज़ उठाने वालों को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है।
यात्रा के पहले चरण में 9 जिलों का दौरा
- सीएम की पश्चिम चंपारण जिले में 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पूर्वी चंपारण से शुरू हुई।
- 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
- 19 जनवरी को सीतामढ़ी और शिवहर का दौरा होगा।
- 20 जनवरी को गोपालगंज, 21 जनवरी को सीवान जाएंगे।
- 22 जनवरी को सारण, 23 जनवरी को मुजफ्फरपुर और 24 जनवरी को वैशाली में रहेंगे।
20 साल में 14 यात्राएं, राज्य की नब्ज लेना मकसद
नीतीश कुमार ने सीएम रहते हुए अब तक बिहार की 14 यात्राएं की हैं, उनकी अपनी गलती के मुताबिक, समृद्धि यात्रा उनकी 15वीं राज्यव्यापी यात्रा है। एक यात्रा वे विपक्ष में रहते हुए कर चुके हैं। आमतौर पर विपक्षी राजनीति का हथियार माने जाने वाली यात्रा को सीएम नीतीश कुमार ने अपने शासन की खासियत बनाया है। इन यात्राओं के जरिए मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद करते हैं और जमीनी हकीकत समझते हैं।
- पहली यात्रा – 2005 में न्याय यात्रा से इसकी शुरुआत की थी, यह बतौर मुख्यमंत्री उनका पहला साल था।
- तीन यात्राएं – लंबे अंतराल के बाद नीतीश कुमार ने तीन यात्राएं- विकास यात्रा, धन्यवाद यात्रा और प्रवास यात्रा कीं। ये लोकसभा चुनाव का वर्ष था।
- पांचवीं यात्रा – 2010 में विश्वास यात्रा के बाद एनडीए सरकार को पूर्ण बहुमत मिला।
- छठी यात्रा – 2011 में जनता के प्रति आभार जताने के लिए सेवा यात्रा शुरू हुई।
- सातवीं यात्रा – साल 2012 में अधिकार यात्रा निकाली।
- आठवीं यात्रा – साल 2013 में दोबारा सेवा यात्रा नाम से देशव्यापी यात्रा शुरू की।
- नौवीं यात्रा – 2014 में संकल्प यात्रा के जरिए जनता तक संवाद बढ़ाया।
- दसवीं यात्रा – 2015 में संपर्क यात्रा का आयोजन हुआ।
- ग्यारहवीं यात्रा- 2019 की जल-जीवन-हरियाली यात्रा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरुकता लाई गई।
- बारहवीं यात्रा- 2020 में समाज सुधार अभियान यात्रा शुरू हुई।
- तेरहबीं- 2023 में समाधान यात्रा निकाली गई।
- चौहदवी यात्रा – 2024 दिसंबर से लेकर 2025 तक मुख्यमंत्री ने प्रगति यात्रा निकाली।
इन यात्राओं में सरकार की योजनाओं की समीक्षा हुई और जनता की शिकायतों का समाधान निकाला गया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ : यात्राओं से बिहार की तस्वीर नहीं बदल रही
वरिष्ठ पत्रकार सुमन भारद्वाज के अनुसार-
- मुख्यमंत्री की यात्राओं का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई जानना है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री गांव और शहरों में जाकर लोगों से सीधा संवाद करते हैं। जिससे मुख्यमंत्री से योजना व क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने में आसानी होती है। लेकिन इन यात्राओं से बिहार की तस्वीर नहीं बदल रही है।
- गृह विभाग ने बीजेपी को सौंप कर राज्य की कानून व्यवस्था से अपना पल्ला झाड़ लिया है, नहीं तो बिहार कई जिलों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ गंभीर घटनाएं हुईं, सासाराम, खगड़िया और पटना में दिल्ली की निर्भया कांड जैसी घटनाएं हुई लेकिन इन सब मुद्दों पर मुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आया। इसलिए इन यात्राओं से बिहार की तस्वीर बदलेगी कहना मुश्किल है।
जीत के तुरंत बाद यात्रा के राजनीतिक मायने
वोटर को धन्यवाद – राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार की बिहार यात्रा के जरिए नीतीश कुमार खुद को मिले अभूतपूर्व समर्थन के लिए महिला वोटर का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहते हैं।
सक्रियता का संदेश – साथ ही वे वोटरों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे फिट हैं और पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। यह बीजेपी के डिप्टी सीएम के लिए भी एक संदेश होगा।
राजद को झटका- चुनाव में करारी हार के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल राजद के जनता के बीच पहुंचने से पहले ही नीतीश कुमार ने यात्रा के जरिए जनता तक संवाद स्थापित करना शुरू कर दिया, इस तरह उन्होंने विपक्ष की रणनीति को भी झटका दिया है।
समृद्धि यात्रा की राह में चुनौती
- सीएम के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने स्वास्थ्य को लेकर पॉजिटिव संदेश देना होगा, हाल की दो यात्राओं में उन्होंने जनता से कोई संवाद नहीं किया है। सभा में लिखा हुआ भाषण पढ़ने, विकास योजनाओं का शिलान्यास करने और अफसरों संग योजनाओं की समीक्षा से जुड़ी जानकारियां ही सामने आई हैं।
- सीएम नीतीश कुमार के साथ पूरे समय डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा नजर आते हैं, मीडिया से उनको दूर रखा जाता है। क्या वे यह संदेश दे पाएंगे कि वे अपना काम स्वतंत्र रूप से कर पा रहे हैं?
- हाल में मोतिहारी में शिलान्यास के बाद नीतीश कुमार बोर्ड गिनने लगे थे, जो वहां मौजूद लोगों को अखरा। पहले भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके असहज करने वाले व्यवहार से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं।
- राजद ने नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के नाम को लेकर ही सवाल उठाया और पूछा कि जिस राज्य में 34% जनता गरीबी रेखा के नीचे रह रही है, वहां सीएम नीतीश कुमार कौन सी समृद्धि देखने जाना चाहते हैं?

