नई दिल्ली| ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले और ईरान के पश्चिम एशिया में किए जा रहे जवाबी हमले के चलते कच्चे तेल की कीमतों मेें भारी उछाल दर्ज किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड की क़ीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे पहले साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद कच्चे तेल का दाम सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि “यह ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए चुकाने लायक एक ‘छोटी क़ीमत’ है।”
हालिया उछाल की मुख्य वजह वैश्विक तेल आवाजाही के प्रमुख रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का प्रभावित होना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी में शिपिंग संकट और गहरा गया है क्योंकि टैंकर फंसे हुए हैं और समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की क़ीमतों में 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 108.68 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। वहीं, अमेरिकी तेल WTI क़रीब 20 फ़ीसदी बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
ट्रंप ने कच्चे तेल की कीमतों में आए ताजा उछाल को ट्रुथ सोशल पर लिखा,
“कम समय के लिए तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं, जो ईरान के परमाणु ख़तरे के ख़त्म होते ही तेज़ी से नीचे आ जाएंगी। अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए यह बहुत छोटी क़ीमत है। सिर्फ़ मूर्ख ही इससे अलग सोचेंगे।”

