नई दिल्ली | अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध तीसरे सप्ताह में और भयावह हो गया है। इजरायल ने 18 मार्च को ईरान की गैस फील्ड पर हमला किया जो दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल गैस फ़ील्ड में से एक है। ट्रंप ने कहा है कि इजरायल ने ऐसा गुस्से में आकर किया और अब आगे वह हमले नहीं करेगा।
ईरान ने इस हमले के जवाब में कतर, यूएई और सऊदी अरब की गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया है।
कतर की मुख्य एलएनजी प्रोसेसिंग साइट को निशाना बनाया गया जिसने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट बढ़ा दिया है। कतर का कहना है कि उसके ऊर्जा नेटवर्क के इस अहम हिस्से को भारी नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि कतर, भारत व चीन समेत विश्व की 20% नेचुरल गैस की जरूरत को पूरा करता है।
ईरान ने कतर के अलावा सऊदी व यूएई के गैस क्षेत्रों पर भी हमले किये हैं, जिसकी दोनों देशों ने पुष्टि की है। सऊदी अरब ने कहा है कि एक गैस फैसिलिटी पर ड्रोन हमले की कोशिश को उसने नाकाम कर दिया। यूएई ने भी बयान जारी करके कहा है कि उसकी दो गैस फील्ड पर ईरान ने ‘आतंकी हमला’ किया जिसने उसे नाकाम कर दिया है।
इन हमलों को लेकर ईरान ने पहले ही चेतावनी जारी की थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को अलग स्तर पर पहुंचा दिया है और वैश्विक ईंधन के दाम बढ़ गए हैं।
यूरोप में तो ईंधन के दामों में 30% की वृद्धि हुई है क्योंकि वह यूक्रेन युद्ध के चलते रूस से ईंधन न खरीदकर कतर पर नेचुरल गैस के लिए निर्भर है।
ईरान के रास लाफ़ान पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा–
“इज़राइल ने मध्य पूर्व में हुई घटनाओं से क्रोधित होकर ईरान की एक गैस फील्ड पर हमला किया था। अब इसराइल ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले नहीं करेगा। लेकिन अगर ईरान ने दोबारा लाफ़ान पर हमला किया तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे को बर्बाद कर देगा।”
डोनाल्ड ट्रंप की इस धमकी और ईरान के बदले की कार्रवाई से चलते पश्चिम एशिया का संकट और गहरा गया है।

