नई दिल्ली | फेसबुक व यूट्यूब की अंतहीन स्क्रॉलिंग और लत लगाने वाले कंटेंट के चलते छोटे बच्चे डिप्रेशन में जा रहे हैं।
अमेरिका की दो अदालतों ने ऐतिहासिक फैसले सुनाते हुए मेटा व यूट्यूब पर 3150 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। साथ ही, जूरी ने कहा है कि इन कंपनियों ने लत की इंजीनियरिंग की है।
द गार्जियन के मुताबिक- लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने 25 मार्च को Meta (फेसबुक-इंस्टाग्राम) और YouTube को जानबूझकर लत लगाने वाले प्रोडक्ट्स डिजाइन करने का दोषी माना।
जूरी ने 20 वर्षीय पीड़िता को $6 मिलियन (लगभग ₹50 करोड़) का हर्जाना देने का आदेश दिया है, जिसमें से 70% Meta और शेष राशि YouTube भुगतान करेगी।
इस पीड़िता को 6 साल की उम्र में YouTube और 9 साल की होने पर Instagram की लत लगी, जिससे वह डिप्रेशन में आ गई और खुद को नुकसान पहुंचाने लगी थी। अदालत ने इसे ‘एडिक्शन की इंजीनियरिंग’ माना है।
इससे ठीक एक दिन पहले यानी 24 मार्च को न्यू मेक्सिको की अदालत ने Meta पर $375 मिलियन (लगभग ₹3,100 करोड़) का भारी जुर्माना लगाया गया है।
न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर जांच की। इसमें पाया कि Meta के प्लेटफॉर्म बच्चों को यौन शोषण और ऑनलाइन ग्रूमिंग से बचाने में पूरी तरह विफल हैं।
जूरी का कहना है कि कंपनियों ने बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अपने ‘मुनाफे’ को प्राथमिकता दी और जनता को सुरक्षा के झूठे दावे कर गुमराह किया।
