नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना सौंपी है। पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए यह योजना ईरान को दी गई है।
यह दावा एसोसिएट प्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से किया है। दूसरी ओर, अमेरिका के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए ईरान ने अपनी 15 शर्तें अमेरिका के सामने रख दी हैं।
अमेरिका की 15-सूत्रीय शर्तें
- 30 दिनों का युद्धविराम।
- नतान्ज, इस्फहान और फोर्डो में ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना।
- भविष्य में कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- ईरान की ओर से परमाणु हथियार विकसित न करने की स्थायी प्रतिबद्धता।
- संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना।
- ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे की IAEA द्वारा पूर्ण निगरानी और देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन पर रोक।
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी के लिए ईरान का समर्थन समाप्त करना।
- क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को रोकना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना।
- ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को हटाना और संयुक्त राष्ट्र के ‘स्नैपबैक’ तंत्र को समाप्त करना।
- ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए अमेरिका का समर्थन।
- ईरान को घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) रोकने के लिए कहा गया है।
- ईरान की मिसाइलों की संख्या और उनकी रेंज सीमित करने की मांग की है।
- बिजली उत्पादन के लिए सहयोग देने की भी पेशकश की है।
- संयुक्त राष्ट्र के ‘स्नैपबैक मैकेनिज्म’ को समाप्त करने का वादा किया गया।
इससे पहले अमेरिका की ओर से आए प्रस्ताव की हंसी बताने हुए ईरानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि “ऐसा लगता है कि अमेरिका अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि खुद से ही बातचीत कर रहा है।”
गौरतलब है कि ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ उनकी बातचीत चल रही है।
ईरान ने ट्रंप के सामने रख दीं 5 शर्तें
ईरान ने अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी हैं और उसका कहना है कि पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध अमेरिका की शर्तों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही समाप्त होगा।
- हमले और हत्या की घटनाएं बंद हों।
- सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो।
- दोबारा युद्ध ना हो, ठोस तंत्र बने।
- युद्ध नुकसान की भरपाई, मुआवजा तय हो।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले।
ईरान की ओर से जारी शर्तें।
ईरान वार्ता के प्रस्ताव पर कर रहा संदेह
ईरान बातचीत के इन अमेरिकी प्रस्तावों को संदेह से देख रहा है क्योंकि अमेरिका अभी भी पश्चिम एशिया में अपने और सैनिक भेज रहा है।
इससे पहले दो बार उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान ही ईरान पर हमले हो चुके हैं।
28 फरवरी को मौजूदा संघर्ष की शुरुआत के दौरान भी ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो रही थी। फिलहाल, ईरान ने किसी भी बातचीत का हिस्सा होने से इनकार किया है।
