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इस्लामाबाद में शांति वार्ता से ठीक पहले ईरान ने रख दी शर्त

नई दिल्ली |  पाकिस्तान में शनिवार से शांति वार्ता शुरू होने जा रही है और ईरान के प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद पहुंच जाने की सूचना है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है।

इन सबके बीच ईरान ने कहा है कि शांति वार्ता शुरू होने से पहले उन दो शर्तों पर अमल हो जाना चाहिए तो संघर्ष विराम के समय ही तय हो गई थीं। ये दो शर्तें हैं- “लेबनान में युद्धविराम और ईरान की फ़्रीज़ की गई संपत्तियों को बहाल करना।”

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने ट्वीट के जरिए यह संदेश अमेरिका को दिया है। उन्होंने कहा-

“लेबनान में युद्धविराम और ईरान की फ़्रीज़ की गई संपत्तियों को बहाल करना बातचीत शुरू होने से पहले होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि ये दोनों शर्तें “पहले ही तय” हो चुकी हैं, लेकिन “अभी तक लागू” नहीं की गई हैं।

बता दें कि सात अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ, तब पाकिस्तान की ओर से बताया गया कि “अमेरिका ने ईरान, लेबनान व उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ दो सप्ताह तक हमला न करने पर सहमति दे दी है। इसके बदले ईरान, होर्मुज़ स्ट्रेट से एक सुरक्षित रास्ता देगा।”


उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बोले- वार्ता के लिए उत्साहित, लेकिन…

इस फैसले के कुछ घंटे बाद ही इज़रायली पीएम ने कह दिया कि लेबनान को सीज़फायर में शामिल नहीं किया गया है। फिर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि लेबनान समझौते में शामिल नहीं है।

उधर, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के लिए उड़ान भरने से पहले मीडिया से कहा ”हम बातचीत को लेकर उत्साहित हैं।”

“उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान ‘अच्छी नीयत’ से काम करता है तो अमेरिका ‘मदद का हाथ बढ़ाने’ के लिए तैयार है, लेकिन अगर ईरान ‘हमें भ्रमित करने की कोशिश करता है’ तो अमेरिका सकारात्मक रुख़ नहीं अपनाएगा।”

उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें बातचीत के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने पहले घोषणा की थी कि ये बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी और इसके शनिवार से शुरू होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान में बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे।

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