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रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव के बीच भारत के लिए ईरानी बंदरगाह खुला

 

नई दिल्ली |

अमेरिका लगातार भारत पर रूस से कच्चा तेल न खरीदने का दबाव बना रहा है, साथ ही उसने भारत के मध्य पूर्व में व्यापार के मुख्य मार्ग पर भी प्रतिबंध लगा रखा था, अब इसमें भारत को बड़ी कूटनीतिक राहत मिली है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से छह महीने के लिए रियायत दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह, भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करने वाला रणनीतिक द्वार है।

इसके जरिए भारत अपना माल अफगानिस्तान और मध्य एशिया भेज सकता है, उसे मध्य एशिया पहुंचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते की जरूरत नहीं पड़ेगी।  यह बंदरगाह भारत को रूस और यूरोप से भी सीधे व्यापार करने में मदद करता है।

ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करने वाला रणनीतिक द्वार है।

सितंबर में अमेरिका ने लगाया था प्रतिबंध

दरअसल भारत ने 2024 में चाबहार को 10 साल के लिए लीज पर लिया था, भारत की योजना यहां 120 मिलियन डॉलर निवेश करने व 250 मिलियन डॉलर का सस्ता कर्ज देने की है। पर बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ हुए संघर्ष के बाद घोषणा कर दी थी कि वह 29 सितंबर से इस बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल कंपनियों पर जुर्माना लगाएगा।

फिर इस छूट को बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दिया गया था, जिसकी मियाद 3 दिन पहले खत्म हुई थी। ट्रंप प्रशासन ने अब इस छूट को अगले 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।

 

अमेरिका की ‘अधितकम दबाव’ के साथ ‘संतुलन’ की नीति 

भारत को मिली छह महीने की छूट ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट (IFCA) के तहत दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 6 महीनों में स्थायी समझौते की जरूरत है, साथ ही अमेरिका का यह कदम ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के बावजूद भारत के साथ संबंधों को संतुलित करने का संकेत है।
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