नई दिल्ली | पिछले साल इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिन के युद्ध में ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता नष्ट हो गई थी। और ईरान अपनी परमाणु क्षमता को दोबारा बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है। यह जानकारी ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने अमेरिका की एक संसदीय कमेटी को दी है।
अपने लिखित बयान में तुलसी गबार्ड ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो दावा किया है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे के एकदम उलट है, जिसमें वे कहते रहे हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने के करीब था इसलिए उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर उस पर हमला किया है।
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के इस बयान के बाद घरेलू व अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सवाल मुखर हो गया है कि ट्रंप ने बिना ठोस आधार के ईरान पर आखिर हमला क्यों किया?
अमेरिकी संसद की ‘सीनेट खुफिया समिति’ को अपने लिखित बयान में तुलसी गबार्ड ने कहा-
“जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह से नष्ट हो गया है। उसके बाद से ईरान ने संवर्धन क्षमता को फिर से बनाने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।”
यह भी गौरतलब है कि राष्ट्रीय खुफिया निदेशक ने लिखित बयान को मौैखिक रूप से पढ़ते हुए इस हिस्से को छोड़ दिया और विपक्षी सांसदों के पूछे जाने पर बोलीं कि उनके पास बयान पढ़ने का पर्याप्त समय नहीं था।

