Site icon बोलते पन्ने

ईरान में विद्रोह का 13वां दिन: अब तक 62 मौतें, पूरे देश में इंटरनेट बंद … आखिर क्यों बिगड़े हालात?

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के चलते पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। यह तस्वीर 8 जनवरी के प्रदर्शन की है। (साभार - X)

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के चलते पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। यह तस्वीर 8 जनवरी के प्रदर्शन की है। (साभार - X)

नई दिल्ली| 

ईरान में 13 दिन से लगातार जारी प्रदर्शनों ने खामनेई सरकार को बीते कुछ वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती दे दी है। ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब वेनेजुएला में ट्रंप ने राष्ट्रपति को अगवा कर लिया और अब वह ईरानी सरकार को धमकी दे रहा है कि अगर प्रदर्शनों को कुचला गया तो वह स्ट्राइक कर सकते हैं। प्रदर्शनों को भड़काने से रोकने के लिए सरकार ने सात साल बाद पूरे देेश में इंटरनेट बंद कर दिया है।

ईरान पहले ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के चलते भारी आर्थिक दवाब में है, जिसके चलते महंगाई बढ़ जाने से जनता नाराज है। ईरान में जारी प्रदर्शनों में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रदर्शन भड़कने से रोकने के लिए ईरान में कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है फिर भी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

कहां से हुई शुरूआत : अचानक महंगाई बढ़ने से दुकानदारों ने हड़ताल की

ये विरोध प्रदर्शन राजधानी तेहरान के बाज़ारों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ़ हड़ताल के रूप में शुरू हुआ जो पूरे देश में आंदोलन बन गया। महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता 13 दिन पहले चरम पर पहुंच गई क्योंकि खाना पकाने के तेल और चिकन जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतें रातोंरात नाटकीय रूप से बढ़ गईं, और कुछ उत्पाद तो दुकानों से पूरी तरह गायब ही हो गए, जिससे दुकानदारों को झटका लगा।

केंद्रीय बैंक के आदेश ने गुस्सा बढ़ाया :

सीएनएन के मुताबिक, इस स्थिति को केंद्रीय बैंक के उस आदेश ने और बदतर बना दिया जिसमें कुछ आयातकों को बाज़ार के बाकी हिस्सों की तुलना में सस्ते अमेरिकी डॉलर प्राप्त करने की अनुमति देने वाले कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया था। जिसके कारण दुकानदारों ने कीमतें बढ़ा दीं और कुछ ने अपनी दुकानें बंद कर दीं, जिससे प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।

सरकार समर्थक ही प्रदर्शन करने लगे :

ऐसी स्थितियों से परेशान होकर बाज़ारी समूह ने प्रदर्शन और हड़ताल शुरू कर दी, ये वही बाजारी समूह हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से इस्लामी गणराज्य का समर्थक माना जाता है। ऐसे में अपनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे इन दुकानदारों का गुस्सा बाकी लोगों के बीच भी फैलता चला गया।

सरकारी राशि से भी गुस्सा शांत नहीं हुआ

सरकार ने सुधारवादी कदम उठाते हुए प्रभावित लोगों को लगभग 7 डॉलर प्रति माह की नकद सहायता देना शुरू किया ताकि दबाव कम हो सके पर यह कदम भी अशांति को कम नहीं कर सका।


प्रदर्शनकारियों की ओर बंदूक ताने ईरानी सुरक्षा बल (साभार – X)

पूरे देश में फैला आंदोलन : सभी 31 राज्यों में प्रदर्शन, पूरे देश में इंटरनेट बंद  


ट्रंप बोले: ‘प्रदर्शनकारियों को मारा तो हम हमला करेंगे’

ट्रंप (सांकेतिक तस्वीर)

AFP के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जनवरी को एक बार फिर चेतावनी दी कि वे सैन्य हमले का आदेश दे सकते हैं और प्रतिबंध भी लगा सकते हैं।

“ईरान गंभीर संकट में है, कुछ सप्ताह पहले सोचा नहीं जा सकता था कि आम लोग इस तरह सड़कों पर कब्जा कर लेंगे। ईरान के नेताओं को संदेश है कि बेहतर होगा कि वे इनपर गोलीबारी शुरू न करें क्योंकि तब हम भी गोलीबारी शुरू कर देंगे। इसका मतलब यह नहीं कि हम ज़मीन पर सेना भेजेेंगे, बल्कि हम बहुत ज़ोरदार चोट वहां पहुंचाएंगे, जहां उन्हें सबसे ज़्यादा दर्द हो।”

ईरान बोला- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अमेरिका ने भड़काया

ईरान सरकार के सर्वोच्च नेता व अन्य प्रमुख नेता। (फाइल फोटो, साभार विकिमीडिया)

रायटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ईरानी राजदूत ने इस वैश्विक संस्था को लिखा है कि उनके देश में हो रहे ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनों’ को हिंसा में बदलने के लिए अमेरिका दोषी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया और देश में अस्थिरता फैलाने वाली कार्रवाइयां करने की कोशिश की।

भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी ?

भारत ने कहा है कि वह स्थिति पर नजदीकी से नजर रख रहा है और शांति और संवाद की अपील की है।


 

सरकार विरोधी प्रदर्शनों का क्या होगा असर?

हाल में ईरानी प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ईरान की एक सड़क को एक प्रदर्शनकारी ने ‘ट्रंप स्ट्रीट’ नाम दे दिया। इस पर व्हाइट हाउस ने तक प्रतिक्रिया दी कि वे ईरानी लोगों की भावनाओं का आदर करते हैं। यह एक उदाहरण भर है, ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब ट्रंप ने कई देशों पर अपना दावा ठोका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की धमकी से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है। प्रदर्शन अगर और फैले तो खामनेई सरकार को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2019 ईंधन प्रदर्शनों से भी बड़ा आंदोलन बन सकता है। अभी तक कोई बड़ा नेतृत्व प्रदर्शन में नहीं दिखा, लेकिन युवा और महिलाएं सबसे आगे हैं। ईरान में अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे।

Exit mobile version