लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य
कभी-कभी हकीकत किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा अविश्वसनीय और भावुक कर देने वाली होती है। लखीसराय में दो साल के एक मासूम की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसे उसके अपने माता-पिता ने मृत समझकर ‘विदाई’ दे दी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज वह बच्चा सुरक्षित है और इसे मुमकिन बनाया है एक सजग पत्रकार, एक संवेदनशील जिलाधिकारी और ममतामयी बाल विकास पदाधिकारी के साझा प्रयासों ने।
माता-पिता ने लावारिस छोड़ा, मसीहा बने पत्रकार
घटना बीते शनिवार की है। कियुल नदी के पाया नंबर 5 के पास एक गरीब दंपति अपने दो साल के बीमार बच्चे को सड़क किनारे छोड़ गया। बच्चे की आंतें बाहर निकली हुई थीं और वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था। आसपास के लोगों ने गंभीर स्थिति में एक लावारिस बच्चे के पड़े होने की सूचना हम हमारे जिला संवाददाता गोपाल प्रसाद आर्य को दी तो उन्होंने पत्रकारिता के धर्म से ऊपर इंसानियत को रखा। उन्होंने बिना वक्त गंवाए बच्चे को गोद में उठाया और सीधे सदर अस्पताल ले गए।
जब अधिकारी बन गए मासूम के अभिभावक
बच्चे की हालत का पता लगने पर जिलाधिकारी नीरज कुमार ने इस केस को मिशन मोड पर लिया। उनके निर्देश पर जिला बाल विकास पदाधिकारी वंदना पांडे ने बच्चे के तुरंत इलाज की जिम्मेदारी संभाली। बच्चे को तुरंत पटना के IGIMS रेफर किया गया। मासूम की जान बचाने के लिए वंदना पांडे ने न केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं, बल्कि जनसहयोग से करीब एक लाख रुपये का चंदा इकट्ठा कर बच्चे का जटिल ऑपरेशन कराया। चार घंटे चली इस सर्जरी के बाद मासूम की जान बच गई। विभाग ने प्यार से इस लावारिस मिले बच्चे का नाम ‘कन्हैया’ रखा है।
‘दाह संस्कार’ कर लौटे माता-पिता का दावा
खबर फैलते ही जमुई जिले के रहने वाले एक दंपति ने बाल विकास कार्यालय पहुंचकर बच्चे पर अपना दावा किया। माता-पिता का कहना है कि वे बच्चे को इलाज के लिए ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उन्हें लगा कि उसकी मौत हो गई है। गरीबी और अज्ञानता के कारण वे उसे नदी किनारे छोड़ आए थे। उन्होंने माना कि किसी झोलाछाप के गलत इलाज के कारण बच्चे की स्थिति इतनी बिगड़ी थी।
सत्यापन के बाद ही होगी सुपुर्दगी
बाल विकास कार्यालय वंदना पांडे ने बताया कि बच्चा फिलहाल खतरे से बाहर है और मेडिकल स्टाफ उसकी देखरेख कर रहे हैं। जिस दंपति ने बच्चे का दावा किया है, उनके ग्राम प्रधान से लिखित सत्यापन कराया जा रहा है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बच्चे को सौंपा जाएगा।

