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मुंगेर : बिहार से यूपी तक पहुंच रही थी नकली Gold Flake-Wills सिगरेट, असली कंपनी ने ट्रैक करके गैंग पकड़वाया

मुंगेर की फैक्ट्री में गोल्ड फ्लैक व अन्य प्रचलित ब्रांड की नकली सिगरेट बनाने की फैक्ट्री मिली।

मुंगेर की फैक्ट्री में गोल्ड फ्लैक व अन्य प्रचलित ब्रांड की नकली सिगरेट बनाने की फैक्ट्री मिली।

मुंगेर | प्रशांत कुमार

बिहार के मुंगेर में नामी ब्रांड की नकली सिगरेट बनाने की फैक्ट्री का पता लगा। पुलिस ने सोमवार की रात (8 nov) छापामारी करके फैक्ट्री से  50 लाख रुपए की नकली सिगरेट बरामद की। हैरानी की बात ये है कि इस फैक्ट्री में बनी नकली सिगरेट बिहार ही नहीं पड़ोसी उत्तर प्रदेश तक में सप्लाई होती थी।

गोल्ड फ्लैक, कैपिस्टन और विल्स जैसे नामी ब्रांड की सिगरेट बनाने वाली कंपनी आईटीसी को मुंगेर में इसके बनने की जानकारी मिली। जिसके बाद शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। नकली सिगरेट बनाने वाली यह फैक्ट्री मुंगेर के पूरब सराय थाना क्षेत्र काली तजिया वार्ड संख्या 24 निवासी पिंकू खां के घर में चल रही थी। मौके से पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया जबकि मुख्य आरोपी फरार होने में सफल रहा। सिगरेट बनने के बाद इसे लोग बिहार के ग्रामीण इलाकों से लेकर ट्रेन व अन्य साधनों के जरिए यूपी में भी सप्लाई कर रहे थे।

 

ब्रांड की नकल वाले रैपर मिले

पुलिस को छापामारी में कई ब्रांड की सिगरेट, रोलर मशीन, प्रिंटर, पंचिंग मशीन और कई सिगरेट के नाम लिखे रैपर मिले।

कंपनी ने नकली सिगरेट को खुद ट्रैक किया
कंपनी के लीगल मैनेजर शिवा ने बताया कि छह महीने से हम लोग लगातार जांच कर रहे थे कि नकली सिगरेट कौन बना रहा है। इसी को लेकर शहर और ग्रामीण इलाकों में मिलीं नकली सिगरेट के सैंपल को इकट्ठा किया। फिर लैब में इसकी जांच की तो पता चला कि बिहार और यूपी के कई जिले और गांव की दुकानों में नकली सिगरेट बेची जा रही है। इस जानकारी के आधार पर वे नकली फैक्ट्री चलाने वाले पिंकू खां के घर तक पहुंच गए। लीगल मैनेजर शिवा का कहना है कि इसके बाद उन्होंने मुंगेर के डीआईजी और एसपी को इस मामले की जानकारी दी।

एक बड़ी पुलिस टीम ने छापा मारा

 ITC कंपनी के अधिकारियों ने इसकी जानकारी मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद को दी। जिसके बाद एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ अभिषेक आनंद, प्रशिक्षु डीएसपी अभिषेक चौबे, मिथलेश तिवारी ,पूरब सराय थानाध्यक्ष सौरभ कुमार महिला थानाध्यक्ष कृति कुमारी कोतवाली थानाध्यक्ष राजीव तिवारी ,जिला आसूचना इकाई की टीम और सशस्त्र बल के साथ छापेमारी की गई।

भनक लगते ही फैक्ट्री से माल हटा गया आरोपी

सोमवार की रात जैसे ही पुलिस पिंकू खान के घर पहुंची, वह फरार मिला और उसके घर में सिगरेट का सामान भी नहीं था। मौके पर उसकी पत्नी से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पता लगा कि पूरा सामान पड़ोसी के घर में शिफ्ट कर दिया है। फिर पुलिस ने पड़ोस के घर में छापामारी की तो वहां भारी मात्रा में नकली सिगरेट व उसे बनाने के उपकरण मिले।

50 लाख की सिगरेट बरामद

लीगल मैनेजर ने बताया की 40 से 50 लाख रूपये की नकली सिगरेट की बरामदगी की गई।  उन्होंने कहा धंधेबाज, स्थानीय दुकानदारों को एक सिगरेट की पैकेट 30 -35 रुपए में देता था और दुकानदार प्रति सिगरेट दस रुपये में बेचते थे।

क्या बोले सदर एसडीपीओ 

सदर एसडीपीओ अभिषेक आनंद ने बताया कि पूरबसराय थाने में केस दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है। हमने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अब तक की जांच से पता लगा है कि यहां पर सिगरेट बनाने के साथ स्टॉक करके जगह-जगह उसे सप्लाई भी किया जाता था। हम इस पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुटे हैं, यह भी आकलन किया जा रहा है कि बरामद हुआ माल कितने रुपये का है।

नकली सिगरेट का शरीर पर असर समझिए  

नकली सिगरेट, असली सिगरेट से कहीं ज्यादा खतरनाक होती हैं। इनमें तंबाकू की मात्रा बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती, लेकिन इनकी भराई में जो मिलावटी चीजें डाली जाती हैं, वे सीधे मौत का कारण बन सकती हैं।नकली सिगरेट में मिलने वाली खतरनाक चीजें (पुलिस-एफएसएल रिपोर्ट्स के आधार पर):

  1. चूरा हुआ कागज / अखबार – सस्ते कागज में मौजूद ब्लीचिंग केमिकल और इंक (स्याही) सीधे फेफड़ों में जाते हैं।
  2. चॉक पाउडर / प्लास्टर ऑफ पेरिस – सांस की नली में जमकर अस्थमा, फाइब्रोसिस और फेफड़ों का सिकुड़ना।
  3. जहर वाले कीटनाशक (DDT, मेलाथियान के अवशेष) – तंबाकू की जगह सूखी घास या पत्तों पर छिड़काव किया जाता है।
  4. स्ट्रिक्नाइन (चूहे मारने की दवा) – कुछ मामलों में निकोटीन का असर देने के लिए मिलाई जाती है; इससे दिल का दौरा, लकवा या अचानक मौत।
  5. भारी धातुएँ – सीसा (Lead), आर्सेनिक, कैडमियम की मात्रा असली सिगरेट से 10-50 गुना ज्यादा।
  6. फफूंद और बैक्टीरिया – खराब स्टोरेज की वजह से फेफड़ों में इन्फेक्शन और टीबी का खतरा।
  7. अज्ञात केमिकल्स – स्मेल और जलने के लिए मिलाए गए अनजाने रसायन जो कैंसर का कारण बनते हैं।

तुरंत और लंबे समय के नुकसान:

  • 24-48 घंटे में: सांस फूलना, सीने में जलन, जी मिचलाना, सिरदर्द, चक्कर।
  • 1-2 हफ्ते में: खांसी में खून, गले में छाले, नाक से खून।
  • लंबे समय में: फेफड़े का कैंसर, मुंह-गले का कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन हेमरेज, नपुंसकता, बच्चों में जन्मजात बीमारियाँ।
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