- चंद्रकांता प्रियदर्शी का जीवन अकेली रह रहीं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
पटना/नालंदा | संजीव राज
अपने पति और बेटे को खोने के बाद एक महिला ने रिश्तेदारों को संपत्ति देकर उनके सहारे रहने के बजाय उसे समाज को समर्पित करने का कदम उठाया है। बिहार के पटना जिले में चंद्रकांता नाम की महिला के जीवन में भले किस्मत ने नाइंसाफी की हो, पर उन्होंने अपने दुखों को अपनी शक्ति बना लिया और समाज के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उन्होंने करोड़ों रुपये की जमीन बेचकर भव्य मंदिर बनवाया है जो अब निर्माण के अंतिम चरण में है।
उनका कहना है कि वे आगे गरीब बेटियों की शादी भी करेंगी। महिला अब तक मंदिर में दो करोड़ रुपये लगा चुकी हैं। साथ ही वे बेजुबान जानवरों विशेषकर कुत्तों की सेवा करती हैं। वे अपने अंदर के अकेलेपन को बयां नहीं कर सकतीं पर समाज के लिए कुछ करने का जज्बा उन्हें जीवित रखे हुए है।
पति की ब्रेन हेमरेज, बेटे की लिंचिंग से मौत
इस समाजसेवी महिला का नाम चंद्रकांता प्रियदर्शी है जो पटना के बेचछी ब्लॉक के बराह गांव की रहने वाली हैं। यह इलाका नालंदा जिले की सीमा पर पड़ता है। चंद्रकांता ने बताया कि उनके पति अरुण कुमार की मौत साल 2014 में ब्रेन हेमरेज से हो गई थी। इसके बाद वे अपने बेटे को अकेले पाल रही थीं, 2023 में बेटे सूर्य प्रियदर्शी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। तब उनका बेटा पढ़ाई कर रहा था। इस घटना ने चंद्रकांता को अंदर तक तोड़ दिया।
संपत्ति बेचकर गांव के लिए मंदिर बना रहीं
बेटे की हत्या हो जाने के बाद चंद्रकांता पूरी तरह अकेली हो गईं, उनके पास पति की 20 बीघा जमीन थी जिसमें से उन्होंने 13 बीघा बेचकर मंदिर बनवाना शुरू किया। इससे पहले पांच बीघा जमीन उन्होंने पति के इलाज में खर्च कर दी थी। अब उनके पास दो बीघा जमीन बची है, उनका कहना है कि अब तक मंदिर में दो करोड़ रुपया लग चुका है। अब भी जो रुपया लगेगा, वे लगाएंगी और आगे गरीब बेटियों की शादी भी करवाने की उनकी योजना है।
‘मंदिर के बहाने लोग पति-बेटे को याद रखेंगे’
उनका कहना है कि मंदिर बनवाने से उन्हें सुकून मिला कि भले उनके परिवार में अब कोई नाम लेने वाला न बचा हो पर इस मंदिर के सहारे लोग उनके पति-बेटे को याद रखेंगे। वे भावुक होकर कहती हैं कि मंदिर की भव्यता के चलते बहुत से नई उम्र के बच्चे इसे देखने आते हैं, इसका वीडियो बनाकर ले जाते हैं, वे जब उन्हें आंटी कहते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है कि अभी भी कोई उन्हें मां जैसा मानने वाला है।
भव्य मंदिर में नौ प्रतिमाएं, पति-बेटे की भी मूर्ति
मंदिर निर्माण में राधा कृष्ण, सूर्य नारायण भगवान, दुर्गा जी का नौ रूप, पंचमुखी हनुमान, अर्द्धनारी शिवलिंग, शनिदेव भगवान की मूर्ति लगी है। साथ ही उन्होंने बताया कि मंदिर में पति और बच्चे की भी प्रतिमा भी लगवा रही हैं ताकि लोग उन्हें याद रखें क्योंकि उन्होंने पति-बेटे की स्मृति में ही मंदिर बनवाया है।

