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नालंदा (बिहार) : सियाचिन की बर्फीली सरहद पर तैनात सैनिक की शहादत, घर आया पार्थिव शरीर

पार्थिव शरीर के घर पहुंचने पर बिलखते परिजन।

नालंदा | संजीव राज

देश की सरहद की रक्षा करते हुए बिहार के नालंदा जिले के एक वीर सपूत ने अपनी जान न्योछावर कर दी है। लेह-सियाचिन की दुर्गम चोटियों पर तैनात रहे सूबेदार सुमन कुमार सिंह को हिमस्खलन के चलते लकवा मार गया और फिर इलाज के दौरान उनका देहांत हो गया। उनकी शहादत के लिए राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई।

शनिवार (28 march) को शहीद सूबेदार सुमन कुमार सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास नूरसराय के मोकरमपुर मिर्जागंज गांव पहुंचा। इस दौरान पूरा इलाका ‘सुमन सिंह अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा। तिरंगे में लिपटे अपने पिता को देखकर उनकी दो बेटियां और दो बेटे अपनी मां से लिपटे रोते-बिलखते नज़र आए, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया।

शहीद सूबेदार सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के मुख्य सहारा थे और दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई भी देश सेवा में लगे हैं और वर्तमान में CISF में कार्यरत हैं।

सैन्य सलामी के बीच नम आंखों से परिजनों और क्षेत्रवासियों ने अपने लाडले को अंतिम विदाई दी। इससे पहले एक वाहन पर उनका शव रखकर क्षेत्र में अंतिम सफर कराया गया, इस दौरान लोगों ने उनके सम्मान में फूल बरसाए।

अंतिम विदाई देने पहुंचे मंत्री श्रवण कुमार।

उनके शव को घर पहुंचाने आए सूबेदार माली सिंह ने बताया कि सैनिक सुमन कुमार सिंह अत्यधिक बर्फबारी और हिमस्खलन जैसी विषम परिस्थितियों के बीच वे ड्यूटी कर रहे थे।

इसी दौरान उन्हें पीलिया की शिकायत हुई, जिसने बाद में पैरालिसिस और ब्लड कैंसर का रूप ले लिया।

गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें यूपी के लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें 27 मार्च को नहीं बचाया जा सका।

तिरंगे में लपेटकर पार्थिव शरीर लाया गया नालंदा स्थित घर।

शहीद के सम्मान में पहुंचे बिहार के ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि

“सुमन जी लंबे समय से सीमा की हिफाजत कर रहे थे। उनकी शहादत और खिदमत बेकार नहीं जाएगी। संकट की इस घड़ी में सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है। सरकारी नियमानुसार मिलने वाली सहायता राशि और अन्य सुविधाएं बिना किसी बाधा के परिजनों को उपलब्ध कराई जाएंगी।”

 

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