- बिहार ने राजगीर पर्यटन स्थल पर एक ही कमरे में मिले चार शव।
- जैन धर्मशाला के कमरे में फंदों पर लटके थे शव, बदबू आने से पता लगा।
- बेंगलुरू का यह परिवार राजगीर घूमने आया था, कमरे में आत्महत्या।
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नालंदा | संजीव राज
बिहार के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल राजगीर के जैन धर्मशाला में एक ही कमरे के अंदर पूरे परिवार ने अपना जीवन समाप्त कर लिया है। धर्मशाला के एक कमरे में चार फंदों पर शव लटके मिले, जिसे जांच के बाद पुलिस ने प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला माना है। मृत मिले चार लोगों में 78 साल की एक बुजुर्ग मां, 50 साल का बेटा, 48 व 43 साल की दो बहनें हैं। यह पूरा परिवार बेंगलौर का रहना वाला जैन धर्म का अनुयायी था।
धर्मशाला के प्रबंधक ने पुलिस को फोन पर सूचना दी कि तीन दिन से बंद एक कमरे के अंदर से दुर्गंध आ रही है। प्रबंधन का मानना था कि कमरे में दो महिलाएं और दो पुरुष होंगे। पर मौके पर पहुंची राजगीर पुलिस ने जब कमरा खोला तो उसमें पंखे पर फंदा लगाकर लटका पुरुष का शव मिला, जिसके हाथ आगे की ओर बंधे थे और मुंह पर टेप लगा था। यह कमरा कड़ियों से पटा था, जिसमें लगे कुंडों पर प्लास्टिक की रस्सियों से बाकी तीन फंदे बनाए गए थे, जिन पर तीनों महिलाएं लटकी मिलीं। तीनों के हाथ पीछे की ओर बंधे और मुंह पर टेप चिपका था।
पुलिस को सभी के आधारकार्ड और बैंक पासबुक भी मिली हैं, जिसके जरिए पुलिस ने बेंग्लौर में पुलिस से संपर्क साधा। पुलिस को यह भी पता लगा है कि तीन भाई-बहनों में सिर्फ बड़ी बहन की शादी हुई थी और कुछ समय पहले उनका तलाक हो चुका था, बाकी दोनों भाई-बहन अविवाहित थे।
जैन धर्मशाला के रजिस्टर के अनुसार, बेंगलुरु के रहने वाले चार लोगों ने 31 जनवरी को एक कमरा बुक कराया था, यह कमरा बेंगलुरु के निवासी जीआर नागा प्रसाद के नाम से बुक था।
राजगीर थानाध्यक्ष रमन कुमार ने बताया कि यह कमरा तीन दिनों से बंद था और उसे खोलने पर 4 लोगों के शव फंदे पर लटके मिले। राजगीर थानाध्यक्ष का यह भी कहना है कि दो दिन पहले स्थानीय लोगों ने बाजार में इन पर्यटकों को घूमते देखा गया था। फिलहाल इस घटना के बाद पुलिस ने धर्मशाला और आस-पास के इलाकों को सील कर दिया गया है।
आपको बता दें कि राजगीर, मगध साम्राज्य के दौर में उसकी राजधानी हुआ करती थी इसलिए इस क्षेत्र का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है और काफी बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं।
यह भी जानकारी मिली है कि मृत पाए गए ये चारों पर्यटक नेपाल से घूमते हुए राजगीर पहुंचे थे और 6 जनवरी को उनकी योजना जैन तीर्थस्थल पावापुरी जाने की थी। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग रहा है. मृतकों के मोबाइल फोन के सहारे उनके परिवार से भी संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है।”
इस पूरे मामले में राजगीर की धर्मशाला में नियमों की अनदेखी सामने आई है क्योंकि धर्मशाला संचालक को इसकी तक जानकारी नहीं थी कि कमरे में कौन-कौन मौजूद है और कमरा तीन दिन से बिना किसी सूचना के बंद क्यों है। अब देखना होगा कि इस घटना में फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारण व परिस्थितियों को लेकर क्या खुलासा होता है? पर यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल में धर्मशालाओं के मनमाने ढंग से चलने का खुला प्रमाण है।

