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बिहार : शहर ही नहीं, गांवों में भी बदल रहे हैं प्रेम के मायने; बक्सर में दो महिलाओं ने साथ जीने का किया फैसला

बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)

बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)

बक्सर | उमेश कुमार

भारत में समलैंगिक प्रेम संबंधों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि ये शहरी माहौल से पैदा हुए प्रेम संबंध हैं। पर सच्चाई यह है कि जिस तरह विषम-लैंगिक प्रेम संबंधों के लिए शहर या गांव की सीमा का कोई खास मतलब नहीं, ठीक उसी तरह समलैंगिक प्रेम के मामले भी किसी एक क्षेत्र सीमा से बंधे नहीं हैं।

इसी कड़ी में बिहार के बक्सर के एक गांव की दो वयस्क महिलाओं के सहमति से साथ रहने की घोषणा करने का मामला सामने आया है। दोनों सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आईं और आपस में प्रेम हो गया। दोनों महिलाओं ने बक्सर के प्रसिद्ध रामेश्वर नाथ मंदिर में माला बदलकर रस्म पूरी की, जिसमें कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।

दोनों महिलाओं ने स्थानीय मीडिया के सामने खुलकर अपने प्रेम व चुनौतियों के बारे में बताया। इनमें एक महिला की उम्र 18 वर्ष है जो खुद को पति की भूमिका में महसूस करती हैं। जबकि दूसरी महिला 32 साल की हैं जो खुद को इस समलैंगिक रिश्ते में पत्नी देखती हैं।

18 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पिता ने उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि वे अब घर न आएं। उधर, 32 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पति नौकरी के लिए बाहर रहते हैं। उन्हें जब से इस रिश्ते का पता लगा, वे उन्हें जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस समलैंगिक जोड़े ने मीडिया के सामने पुलिस सुरक्षा की मांग उठाई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने को इस बारे में जानकारी दी है या नहीं।

32 वर्षीय महिला ने अपने पूर्व रिश्ते के बारे में बताया कि उनकी 2010 में शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। उनके मुताबिक, दोनों बच्चे पहले से ही एक करीबी रिश्तेदारी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अब अपने समलैंगिक रिश्ते में आगे बढ़ना चाहती हैं।

समलैंगिक जोड़े ने बताया कि बक्सर के मंदिर में आने से पहले वे  यूपी के मिर्जापुर गई थीं। वहां के अष्टभुजी मंदिर में जाकर उन्होंने अपने रिश्ते का धार्मिक विधि-विधान किया था। दोनों महिलाओं का कहना है कि वे आगे एक साथ ही रहेंगी, जो भी चुनौतियां आएंगी, उसका डटकर सामना करेंगी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालांकि, भारत में अभी समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन दो वयस्कों को अपनी मर्जी से साथ रहने (Live-in Relationship) का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
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