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26 जनवरी को अंडा-मीट की बिक्री रोकी, विरोध में उतरे लोग तो कलेक्टर ने वापस लिया आदेश, जानिए पूरा मामला

गणतंत्र दिवस के मौके पर मीट बैन करने की घटना ने प्रशासनिक विवेक पर सवाल खड़े किए हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

गणतंत्र दिवस के मौके पर मीट बैन करने की घटना ने प्रशासनिक विवेक पर सवाल खड़े किए हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली |

भाजपा शासित ओडिशा के कोरापुट जिले में 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर नॉनवेज की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। 50% आदिवासी समुदाय की आबादी वाले इस जिले में कलेक्टर के आदेश की खूब आलोचना हुई, इसके बाद रविवार (25 जनवरी) को आदेश वापस ले लिया गया है। हालांकि स्थानीय मीडिया के मुताबिक, आदेश वापसी के बाद भी कई नॉनवेज दुकानदार आशंकित हैं कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए।

23 जनवरी को डीएम ने दिया था बैन का आदेश

दरअसल 23 जनवरी को कोरापुट जिले के डीएम मनोज सत्यवान महाजन ने सभी तहसीलदारों, बीडीओ और अन्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आधिकारिक अधिसूचना जारी करके 26 जनवरी को मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री पर रोक सुनिश्चित करें। उस आदेश में अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई करने को भी कहा गया था।

क्या था बैन का कारण-

इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह आदेश इस शिकायत पर जारी हुआ था कि कुछ लोगों ने डीएम से शिकायत की थी कि  26 जनवरी को जब परेड चल रही होती है, तब कुछ शहरी इलाकों में नॉनवेज बिक रहा होता है जो ‘ठीक’ नहीं है।

पूरे राज्य में होने लगी बैन की आलोचना

कोरापुट जिले के कलेक्टर के आदेश की न सिर्फ जिले में आलोचना शुरू हुई बल्कि ओड़िशा में सोशल मीडिया पर लोग इसके खिलाफ प्रतिक्रिया देने लगे। कई लोगों ने सवाल उठाया कि एक राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह के प्रतिबंध के पीछे का कारण क्या है? राज्य में इस मुद्दे पर बहस छिड़ जाने के बाद रविवार को डीएम ने एक रिवाइज लेटर जारी किया है।

आखिर डीएम को आदेश वापस लेना पड़ा

रविवार को अपने पहले के आदेश को निरस्त करते हुए कोरापुट जिलाधिकारी ने सभी तहसीलदारों, ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और अन्य कार्यकारी अधिकारियों को इस संबंध में नया पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि “मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय ‘जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस तैयारी समिति’ के सुझाव के आधार पर लिया गया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर आई प्रतिक्रियाओं और गहन विचार-विमर्श के बाद 23 जनवरी को जारी आदेश को वापस लेने का निर्णय किया गया है।”

 

 

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