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ईरान युद्ध का एक महीना पूरा : कई मोर्चों पर उलझी इज़रायली सेना के बिखरने की चेतावनी सामने आई

नई दिल्ली | एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रही इज़रायली सेना की चुनौतियों को लेकर इजरायली सेना (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ (CDS) ने बड़ी चेतावनी दी है।

इसराइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने चेतावनी दी है कि आईडीएफ़ पतन के कगार पर है।

लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने कहा है कि

“सैनिकों की भारी कमी और लगातार बढ़ रहे काम के दबाव के कारण इजराइली सेना अंदर से बिखर सकती है।”

एक साथ कई मोर्चों पर उलझी सेना

इज़रायली सेना पहले ही गज़ा में हमास से लड़ रही है। ठीक एक महीने पहले 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे।

इसराइली सेना तब से ईरान और लेबनान में हमले कर रही है। उसे हिज़्बुल्लाह और ईरान के जवाबी हमलों से निपटना पड़ रहा है।

साथ ही, इजरायल ने सीरिया में भी दुश्मन के ठिकानों पर हमले किए हैं।

इस तरह इज़रायल की सेना को कई मोर्चों पर एक साथ उलझना पड़ रहा है।

विपक्षी नेता का आरोप- बिना तैयारी के सेना उतारी

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने नेतन्याहू सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उसने सेना को बिना किसी रणनीति के युद्ध में भेज दिया है।

उनका कहना है कि सेना को कम सैनिकों के साथ युद्ध के मैदान में उतारा गया है।

हिब्रू भाषा में दिए गए एक वीडियो बयान में लैपिड ने कहा,

“आईडीएफ़ अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी है और उससे भी आगे निकल गई है। सरकार सेना को घायल हालत में ही युद्ध के मैदान में छोड़ रही है।”

हरेदी समुदाय को सेना में उतारने की मांग

विपक्षी नेता यायर लैपिड ने सरकार से आग्रह किया है कि वह अति रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के पुरुषों को सेना में भर्ती करें। ये लोग अपना पूरा समय पवित्र यहूदी ग्रंथों के अध्ययन में समर्पित करते हैं। 1948 में इसराइल के गठन के बाद से आम तौर पर अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है।

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