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पटना हॉस्टल रेप-मर्डर केस: NEET छात्रा की मौत में अब तक क्या-क्या सामने आया, पुलिस की भूमिका पर सवाल क्यों उठे?

पटना हॉस्टल में छात्रा के साथ रेप और मर्डर की घटना के बाद न्याय की मांग करते लोग।

पटना हॉस्टल में छात्रा के साथ रेप और मर्डर की घटना के बाद न्याय की मांग करते लोग।

नई दिल्ली|

इन दिनों बिहार के अभिभावकों के बीच हॉस्टल में लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा छाया हुआ है। हर कोई जानना चाहता है कि पटना हॉस्टल में अचानक 17 साल की एक लड़की के साथ ऐसा क्या हुआ जिसे पटना पुलिस सुसाइड बताने लगे जबकि परिवार वालो का कहना है कि उनकी बेटी से रेप करके मर्डर कर दिया गया।  आइए इस मामले के हर पहलू पर नजर डालें।

लड़की की तबीयत कहां बिगड़ी, मौत कैसे हुई?

जहानाबाद में अपने घर से नया साल मनाकर 5 जनवरी 2026 को छात्रा अपने हॉस्टल लौटी जिसका नाम शंभू गर्ल्स हॉस्टल है। परिवार का कहना है कि रात में सोने से पहले बेटी ने फोन पर बात की थी। छात्रा के मामा के मुताबिक, अगली शाम (6 जनवरी) हॉस्टल से बाहर के एक व्यक्ति ने फोन करके बताया कि वह बेहोश मिली है, उसे डॉक्टर सहजानंद के यहां लेकर जा रहे हैं। बाद में हॉस्टल की वार्डन ने फ़ोन किया कि बच्ची क्रिटिकल है। फिर पटना के ही प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। वहां के इलाज से असंतुष्ट परिवार ने छात्रा को 10 जनवरी को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन 11 जनवरी की दोपहर छात्रा की मौत हो गई।

परिजनों ने क्यों रेप का केस फाइल कराया?

परिजनों ने लड़की के शरीर पर चोटें (सिर, गर्दन, प्राइवेट पार्ट्स) देखकर रेप का शक जाहिर किया। प्रभात खबर का दावा है कि एक डॉक्टर ने परिवार को बताया कि उनकी बेटी के साथ ‘कुछ गलत’ हुआ है। परिवार के मुताबिक, 8 जनवरी को लड़की करीब चार घंटे होश में रही और उसने इशारे में कहा कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। हालांकि परिवार का यह भी कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कोई बयान रिकॉर्ड नहीं करने दिया। परिवार हॉस्टल रूम चेक करने गए पर वहां सफाई की जा चुकी थी। शक के आधार पर परिवार ने रेप का केस 9 जनवरी को दर्ज हुआ।

पुलिस ने क्यों कहा- रेप नहीं सुसाइड है?

पटना पुलिस ने रेप की धाराओं में केस तो दर्ज कर लिया पर कहा कि प्राथमिक जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है और लड़की के कमरे से नींद की दवा की शीशी मिली है। फिर पुलिस ने 13 जनवरी को एक प्रेस रिलीज़ जारी की, जिसमें कहा गया कि स्त्री रोग चिकित्सक की जांच में यौन हिंसा की पुष्टि नहीं हुई। यह भी कहा गया कि 8 जनवरी को छात्रा के यूरिन में नींद की गोलियों का डोज पाया गया। पुलिस ने छात्रा के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री के हवाले से दावा किया कि 24 दिसंबर को सुसाइड और 5 जनवरी को नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट कब आई, रेप की पुष्टि पर SIT कब बनी?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट 15 जनवरी 2026 को पुलिस को मिली, जिसमें सेक्शुअल असॉल्ट की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में “मार्क्स ऑफ वायलेंस” और 1.5-2 घंटे के प्रतिरोध के निशान बताए गए। जिसके आधार पर समझा गया कि मरने से पहले छात्रा ने अपने साथ हुई यौन हिंसा का विरोध किया। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस की सुसाइड थ्योरी पर सवाल उठे तो 17 जनवरी को SIT बनने की घोषणा बिहार DGP ने की। तब IG जितेंद्र राना ने हॉस्टल का दौरा भी किया, तब जाकर 20 जनवरी को हॉस्टल सील किया गया।

पुलिस ने कितने लोगों को अब तक पकड़ा?

इस बीच पटना व जहानाबाद में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होने लगे और पूछा जाने लगा कि पुलिस ने हॉस्टल मालिक को क्यों नहीं पकड़ा है। तब जाकर पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया। इसके अलावा हॉस्टल के दो कर्मियों समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।

क्या है रेप-मौत की थ्योरी?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस मानकर चल रही है कि छात्रा के साथ रेप हुआ और फिर हत्या की गई। हॉस्टल में घटना को ढंकने की कोशिश हुई। उसने डेढ़ से दो घंटे तक प्रतिरोध किया। दूसरी ओर, परिवार का दावा है कि उनकी बेटी के साथ गैंग रेप हुआ और उसे सुसाइड का रूप दिया गया। गौरतलब है कि डॉक्टरों ने पुष्टि की कि पेनिट्रेटिव असॉल्ट नहीं, लेकिन सेक्शुअल वायलेंस हुआ।

न्याय की मांग लेकर कांग्रेस सड़क पर, तेजस्वी भी बोले

पटना में कांग्रेस ने सड़क प्रदर्शन करके नीट छात्रा के न्याय का मुद्दा उठाया। (साभार – X/INCBihar)

बीते 19 जनवरी को कांग्रेस ने इस मामले पर पटना में जोरदार प्रदर्शन किया। इससे पहले जहानाबाद जाकर सांसद पप्पू यादव और जनसुराज नेता प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिले और दोनों ने ही पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए। साथ ही, लंबी चुप्पी के बाद ट्वीट करके तेजस्वी यादव ने भी इस घटना को लेकर नीतीश सरकार सवाल उठाए।

जीतनराम मांझी ने आखिर क्यों कहा- CBI जांच होगी?

केंद्रीयमंत्री जीतनराम मांझी ने 18 जनवरी को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जघन्य अपराध है, सरकार अपना काम कर रही है, SIT बनाई गई है और इस मामले को CBI ने टेकअप किया है। उन्होंने कहा कि जिसने भी यह अपराध किया है, वह सज़ा से बच नहीं पाएगा। मांझी के इस बयान से कंफ्यूजन पैदा हुआ कि क्या इस मामले को सीबीआई ने अपने हाथों में ले लिया है ? हालांकि पुलिस की ओर से ऐसी कोई जानकारी सामने नही्ं आई है।

जांच का क्या है स्टेटस?

मामले की जांच SIT कर रही है, जहानाबाद जाकर भी टीम ने परिवार से केस पर पूछताछ की है क्योंकि छात्रा एक दिन पहले ही घर से लौटी थी। इस मामले में हॉस्टल के CCTV और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।

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