- प्रशांत किशोर का आरोप- तारापुर केस नंबर 44/1995 सम्राट के खिलाफ है, जिसमें 7 लोगों की हत्या हुई थी।
- आरोप लगाया- नाबालिग होने के नाम पर सम्राट चौधरी को जेल से निकाला गया था, गलत दस्तावेज लगाए थे।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने सोमवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर राजनीतिक भूचाल ला दिया।
“तारापुर केस नंबर 44/1995 इनके (सम्राट) खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट का डॉक्यूमेंट है, जो सम्राट चौधरी ने दिया है। नाबालिग होने के नाम पर इनको जेल से निकाला गया था। इनका जो इलेक्शन डॉक्यूमेंट है, जो उन्होंने 2020 में दिया है। उसके अनुसार इनकी उस समय उम्र 26 साल होनी चाहिए।” – पीके ने प्रेसवार्ता में कहा
‘सम्राट चौधरी की गिरफ्तारी होनी चाहिए वरना बिहार में जितने लोग हत्या के अभियुक्त हैं, उनको भी जेल से रिहा कीजिए। अगर पुलिस अरेस्ट नहीं करती है, तो हम लोग कोर्ट जाएंगे।
“सम्राट चौधरी बता दें कि उनसे शिल्पी के रेप व मर्डर के मामले में पूछताछ हुई थी या नहीं। अगर वे मना करते हैं तो हम पूछताछ के कागज जारी करेंगे।” – प्रशांत किशोर
- आरजेडी: तेजस्वी यादव ने कहा, “पीके सही मुद्दा उठा रहे हैं। सम्राट जैसे लोग जंगलराज का प्रतीक हैं। सरकार कार्रवाई करे, CBI जांच हो।”
- कांग्रेस: शकील अहमद खान ने कहा, “NDA की नाकामी है कि हत्या के आरोपी मंत्री बने। तारापुर की निष्पक्ष जांच हो।”
गौरतलब है कि भले तेजस्वी ने पीके के आरोपों का समर्थन किया हो पर उन्होंने तेजस्वी के भ्रष्टाचारी नेताओं की लिस्ट बनाने को लेकर तंज कसा। बोले- “उनके मामा, माता-पिता का नाम लिस्ट में पहले लिखना पड़ेगा। RJD चोर है, पूरा बिहार जानता है।”
अशोक चौधरी की प्रॉपर्टी पर सवाल उठाया
प्रशांत किशोर ने ग्रामीण निर्माण मंत्री अशोक चौधरी की प्रॉपर्टी और उनके 100 करोड़ की नोटिस पर सवाल उठाए।
अशोक चौधरी पर वैभव विकास ट्रस्ट के जरिए पिछले साल 100 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदने का आरोप लगाया। यह भी आरोप लगाया कि ‘अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी की शादी के बाद 100 करोड़ की प्रॉपर्टी न्यास बोर्ड की और से खरीदी गई है।’
बता दें कि अशोक चौधरी ने 23 सितंबर को पीके को 100 करोड़ की मानहानि का नोटिस भेजा था।
BJP में तेजी से बढ़ा था सम्राट का कद
सम्राट चौधरी को बीजेपी में शामिल हुए अभी महज 6 साल पूरे हुए हैं, वे 2017 में पार्टी में शामिल हुए, तब पंचायती राज मंत्री बनाए गए थे। फिर वो प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष बने और फिर उपमुख्यमंत्री बनाए गए।
बिहार में सम्राट चौधरी का नाम नीतीश कुमार के धुर विरोधी नेता के तौर पर लिया जाता रहा है।
सम्राट चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं, वो कोइरी (कुशवाहा) वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
माना जाता है कि बीजेपी ने ओबीसी को साधने के लिए सम्राट को आगे बढ़ाया था।
सम्राट के पिता शकुनी चौधरी मुंगेर में सात बार के विधायक व सांसद रह चुके हैं। उनकी मां पार्वती तारापुर से विधायक रह चुकी हैं। गौरतलब है कि शकुनी चौधरी ने साल 1999 में बिहार में राबड़ी देवी की सरकार का साथ दिया था, हालांकि वो ख़ुद उस वक़्त सांसद थे।

