नई दिल्ली | दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि ईद के मौक़े पर आम लोगों की ज़िंदगी में कोई रुकावट न आए। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश गुरुवार (19 मार्च) को ईद से ठीक पहले आया है। भारत में चांद की तस्दीक के आधार पर ईद 20 या 21 मार्च को मनाई जा सकती है।
अदालती रिपोर्टिंग करने वाली समाचार वेबसाइट लाइव लॉ ने कोर्ट के आदेश के हवाले से कहा है कि “दिल्ली पुलिस को ऐसी व्यवस्था करने के लिए कहा गया है जिससे हर किसी को ‘सुरक्षित’ माहौल महसूस हो। समाज के किसी भी वर्ग से किसी को भी ऐसा करने की इजाज़त न दी जाए जिससे हालात बिगड़ें।”
दरअसल नागरिक अधिकारों की पैरोकारी करने वाले एक संगठन ‘एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स’ की याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को ऐसा आदेश दिया है।
आदेश में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की चिंता बीते 4 मार्च को हुई घटना से जुड़ी प्रतीत होती है, ऐसे में दिल्ली पुलिस को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
होली पर दो घरों में झगड़े में हुई थी तरुण की मौत
बता दें कि पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन दो परिवारों के बीच हुए झगड़े में तरुण नामक एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ यह हिंसा तब शुरू हुई जब होली खेलते समय तरुण के परिवार की एक लड़की ने पानी से भरा गुब्बारा फेंका, जो पड़ोसी परिवार की एक महिला पर जा गिरा। जिसके बाद दो परिवारों मेें झगड़ा हुआ।
सांप्रदायिक हिंसा की संभावना पर ऐक्शन की मांग
इस घटना ने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया था। जिसके बाद ‘एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स’ ने चिंता जाहिर की कि ईद पर उत्तम नगर में सांप्रदायिक हिंसा हो सकती है क्योंकि इस इलाके में ईद को लेकर उकसावे वाले बयान दिये जा रहे हैं और लोगों को इकट्ठा किया जा रहा है। इस चिंता के साथ इस संगठन ने 15 मार्च को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर ऐक्शन लेने को कहा। फिर इसी मामले में दिल्ली पुलिस को निर्देश देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
ईद खुशी का त्योहार, किसी की जिंदगी पर न हो असर
चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने अपने आदेश में कहा, “ईद खुशी का त्योहार है, यह सबकी ज़िम्मेदारी है कि इस मौके पर किसी भी तरह की घटना से आम लोगों की ज़िंदगी प्रभावित न हो। राज्य और ख़ासकर पुलिस की ज़िम्मेदारी बनती है कि हर नागरिक अपने धार्मिक अधिकार और त्योहार की ख़ुशियां शांति से मना सके।”

