- जनसुराज के सूत्रधार PK बिहार के हर जिले का दौरा करेंगे।
- बिहार नवनिर्माण अभियान को अगले पांच साल तक चलाएंगे।
- बोले- ‘बिहार की गद्दी पर वे बैठेंगे जिनकी प्राथमिकता गुजरात है।’
मुंगेर/नवादा | प्रशांत कुमार/अमन सिन्हा
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने कहा था कि वे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई NDA सरकार को काम करने के लिए छह महीने का समय देंगे। अगर सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी तो वे दोबारा बिहार की हर पंचायत में घूमकर ‘नवनिर्माण अभियान’ चलाएंगे।
बिहार नवनिर्माण अभियान के दौरान नवादा में अपने नेताओं के साथ प्रशांत किशोर। (तस्वीर – नवादा संवाददाता)
अब जबकि नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बनकर मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं, तो जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर दोबारा जमीन पर उतर गए हैं। यह अभियान जून में शुरू किया जाएगा, उससे पहले वे हर जिले में घूमकर अपनी पार्टी के नेताओं को अभियान के लिए तैयार कर रहे हैं जो अगले पांच साल चलेगा।
25 मार्च को मुंगेर और बीते सप्ताह नवादा पहुंचे पीके ने बिहार में नए मुख्यमंत्री बनने, नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री और जेडीयू के ‘परिवारवाद’ पर तीखा हमला किया है।
बिहार की नई सत्ता संरचना पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा,
“अब बिहार की गद्दी पर वे लोग बैठेंगे जिनकी पहली प्राथमिकता बिहार न होकर गुजरात होगी। अब बिहार के फैसले गुजरात के हितों को देखकर लिए जाएंगे।”
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर पीके ने कहा कि यह कोई ‘स्वैच्छिक फैसला’ नहीं है। उन्होंने दावा किया,
“202 विधायकों के समर्थन के बावजूद उन्हें पद छोड़ना पड़ रहा है क्योंकि उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति अब शासन चलाने लायक नहीं रही। हमने चुनाव से पहले ही कहा था कि नतीजा जो भी हो, नीतीश अगले 5 साल सीएम नहीं रहेंगे।”
नवादा में 22 मार्च को प्रशांत किशोर से निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर पूछा गया तो वे बोले कि नीतीश कुमार के चेहरे से समाजवाद का मुखौटा उतर गया है। उन्होंने कहा-
“यह दर्शाता है कि हर नेता ने अपने बेटों के भविष्य का इंतजाम कर रखा है, बिहार के लोग समझें कि उन्हें इन नेताओं के बहकावे में नहीं आना चाहिए, वरना उनका बेटा उनकी तरह की गरीबी में रह जाएगा।”

