- सासाराम प्रखंड की करसेरुआ पंचायत में फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही।
- बोला जा रहा- मनरेगा बंद हो गया, विभाग के कहने पर इसका रुपया निकाला जा रहा है।
- प्रखंड कार्यालय पदाधिकारी व पंचायत रोजगार सेवक मिलकर कर रहे घोटाला।
रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
मनरेगा को हटाकर बनाए गए नए कानून VB–G-RAM-G ले आई है, जिनसे योजना से जुड़े कर्मचारियों को घोटाला करने का नया उपाय दे दिया है। बिहार के रोहतास जिले में एक मामला सामने आया है, मनरेगा बंद होने के नाम पर फर्जी ऑनलाइन हाजिरी लगाकर मजदूरों के नाम पर पेमेंट निकाला जा रहा है। इस मामले में सासाराम ब्लॉक के ग्रामीणों ने डीएम से कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में आरोपी पदाधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है।
मनरेगा बंद होने के नाम पर लोगों को बहका रहे
यह पूरा मामला रोहतास जिले के सदर प्रखंड सासाराम से जुड़ा है। यहां की ग्राम पंचायत करसेरुआ के आम लोगोें को बुलाकर ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही है, जिसमें सासाराम के प्रखंड कार्यालय पदाधिकारी व पंचायत रोजगार सेवक मिले हुए हैं। आरोप है कि आम लोगों को निर्माण साइट पर बुलाकर फोटो खिंचवाते हुए समझाया जा रहा है कि “ऐसा मनरेगा कार्यालय के कहने पर हो रहा है क्योंकि यह योजना बंद होकर VB–G-RAM-G हो चुकी है। अब किसी तरह इसका रुपया निकालकर योजना को बंद करना है।”
आवेदन में बताया गया है कि किस तरह मनरेगा बंद होने के नाम पर ग्रामीणों को बहकाकर फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही है।
कुसुढ़ी गांव के जॉब कार्ड, करसेरुआ के लोगों की हाजिरी
करसेरूआ गांव के शिकायतकर्ता धर्मेंद्र पासवान ने डीएम से शिकायत में कहा है कि इस योजना के मास्टर रोल में ग्राम कुसुढ़ी के लोगों के जॉब कार्ड हैं लेकिन जिन्हें बुलाकर ऑनलाइन हाजिरी करायी जा रही है, वे सभी करसेरुआ पंचायत के आम महिला-पुरुष हैं।
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र पासवान ने इस मामले की शिकायत डीएम, उपविकास आयुक्त, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से की है।
शिकायतकर्ता ने दो जनवरी से नौ जनवरी के बीच के मास्टर रोल और इस दौरान लगाई गई ऑनलाइन हाजिरी की डिटेल भी डीएम को सौंपी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर जॉब कार्ड धारकों के फोटो से ऑनलाइन हाजिरी के फोटो का मिलान कर लिया जाए, तब भी साफ हो जाएगा कि किस तरह सरकारी रुपये का गवन किया जा रहा है।
सिर्फ कागजों पर काम, नहीं मिल रही गारंटेड मजदूरी
इस मामले ने एक बार फिर उस चिंता को सामने ला दिया है कि मनरेगा में भले सौ दिन के काम की गारंटी मिल रही थी पर जमीन पर मजदूरों को गारंटी के आधे दिनों का काम तक नहीं मिलता। अब नए कानून VB–G-RAM-G में 125 दिनों के काम की गारंटी केंद्र सरकार दे रही है, पर जमीन पर इस योजना को चलाने वाले अभी से घपला करने लगे हैं, ऐसे में आम मजदूर नए कानून से भला क्या उम्मीद कर सकते हैं।

