- रोहतास जिले में एक किशोरी ने खुद के अपहरण की साजिश रची।
- पुलिस एक सप्ताह तक किशोरी को ढूंढती रही तब राज खुला।
- किशोरी ने कहा कि वह परिवार की पाबंदी व प्रताड़ना से परेशान थी।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है। यह कहानी ऐसी लड़की की है जिसने अपनी स्वतंत्रता के लिए अपने ही परिवार के खिलाफ एक जोखिम भरा कदम उठाया।
दरअसल जिले के डालमियानगर थाना क्षेत्र के मनेरी बिगहा की एक स्कूली छात्रा का एक सप्ताह पहले कथित तौर पर ‘अपहरण’ हो गया था है। पुलिस की जांच में पता चला कि उसने खुद ही अपने अपहरण की साज़िश रची थी।
लेकिन उसने ऐसा क्यों किया?
पुलिस के मुताबिक, 28 अप्रैल 2026 को एक नाबालिग छात्रा अपने कॉलेज के लिए घर से निकलने के बाद लापता हो गई। लड़की के घर न लौटने के अगले दिन यानी 29 अप्रैल को उसके फोन नंबर से व्हाट्सऐप पर परिवार को एक मैसेज मिला, जिसने चिंता बढ़ा दी। बकौल लड़की का भाई, यह मैसेज था – “मेरा अपहरण कर लिया गया है और मुझे सासाराम में रखा गया है।”
पुलिस जांच में क्या निकला?
चूंकि मामला नाबालिग छात्रा के अपहरण के जुड़ा था इसलिए डेहरी के एएसपी अतुलेश झा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। पुलिस ने जब लोकेशन ट्रेस की, तो कहानी पूरी तरह पलट गई। लड़की सासाराम में नहीं, बल्कि डेहरी ऑन सोन रेलवे स्टेशन पर मिली।
हफ़्ते भर तक पुलिस को चकमा देने के बाद जब किशोरी को पुलिस ने पकड़ लिया।
“फर्जी अपहरण पर लड़की पर नहीं होगा ऐक्शन”
एएसपी अतुलेश झा के मुताबिक, “किशोरी अपने घर में कई तरह के सामाजिक बंधन और पाबंदियों के कारण खुद को प्रताड़ित महसूस करती थी। इसी से छुटकारा पाने के लिए उसने अपहरण की साज़िश रची।” उन्होंने बताया कि लड़की ने इस बाबत लिखित बयान में यह जानकारी दी है।
एएसपी अतुलेश झा ने कहा कि –
“चूंकि यह कोई क्रिमिनल मामला नहीं बल्कि सामाजिक प्रताड़ना का मामला है इसलिए परिवार के ऊपर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि उन्हें समझाया गया है।”
साथ ही, अपने अपहरण की साजिश रचने वाली किशोरी को भी समझाकर उनके परिवार को सौंप दिया गया है। गौरतलब है कि इस मामले में कोई प्रेम प्रसंग का एंगल सामने नहीं आया है।
इस घटना पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सामाजिक बदलावों पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी घटनाएं एक बड़ा सवाल छोड़ रही हैं कि क्या घरों के भीतर लगाई जाने वाली ‘सामाजिक पाबंदियां’ युवाओं को इस तरह के कदम उठाने पर मजबूर कर रही हैं?
रोहतास की इस घटना ने पुलिस को तो राहत दे दी, लेकिन उन परिवारों के लिए यह एक सबक है जहाँ आज़ादी और पाबंदी के बीच की लकीर बहुत धुंधली हो गई है।

