- रोहतास का अदृश्य पुल शेरशाह सूरी की इंजीनियरिंग का उदाहरण।
- बरसात में डूब जाता और सूखे में उभर जाता है यह अदृश्य पुल।
- शेरशाह सूरी ने GT Road के लिए इस पुल को बनवाया था।
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रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में एक अनोखा ऐतिहासिक पुल है, जो बरसात में पानी में समा जाता है और सूखे में उभर आता है। स्थानीय लोग इसे “अदृश्य पुल” कहते हैं। देहरी-ऑन-सोन (Dehri-on-Sone) के पास सोन नदी में छिपे इस पुल का महत्व इसलिए भी बहुत है क्योंकि इसे शेरशाह सूरी (1540-1545) ने बनवाया था।
जिन्होंने एशिया की सबसे लंबी व पुरानी सड़क कहे जाने वाले ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road या Sadak-e-Azam) को बनवाया। इस रोड का विस्तार करते हुए उन्होंने बंगाल से अफगानिस्तान तक रोड बनवाई, जिसके चलते यह अदृश्य पुल बना, जिसकी कहानी आज हम आपको बता रहे हैं। तब यह रोड व्यापार, सेना की आवाजाही और साम्राज्य नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण था। लेकिन इसके निर्माण में सोन नदी एक बड़ी बाधा थी क्योंकि बरसात में नदी उफान पर होती थी।
GT Road पर सोन नदी पार करना जरूरी था, इसलिए 4 किमी लंबा और 20 फीट चौड़ा पत्थर का causeway यानी उभरी सड़क या पुल बनवाया गया जो पारंपरिक पुल से एकदम अलग है। यह 10 फीट लंबे पत्थर से बना था। यह पुल submersible causeway था जो बरसात में डूब जाता, लेकिन सूखे में रोड बन जाता है। यह शेरशाह काल की इंजीनियरिंग का कमाल है।
Indrapuri Barrage से पानी छोड़नेे के चलते बरसात में सोन नदी का जलस्तर बढ़ता है इसलिए यह पुल पानी में डूब जाता है। पानी घटने पर पत्थरों की कतार फिर दिखती है। यह हर साल होने वाला दृश्य चमत्कार जैसा लगता है लेकिन अब संरक्षण की कमी से इसका वजूद मिट रहा है। साथ ही Nehru Setu जैसे आधुनिक पुल बनने से उपयोगिता खत्म हो गई।
पुरातत्व विभाग (ASI) ने साल 2016 में इसकी खोज की थी, लेकिन पूर्ण संरक्षण नहीं हुआ। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और रेत माफिया की गतिविधियों से पत्थर क्षरण का शिकार हो रहे हैं। ASI ने इसे प्रोटेक्टेड नहीं किया, इसलिए पर्यटन विकास नहीं हो पाया।

