- करोड़ों का ढांचा खड़ा पर बूंद-बूंद को तरस रहे शूरवीर के ग्रामीण
- मेनटेनेंस करने वाले को मानदेय नहीं मिला तो गांव का पानी रोका।
सिवान | गगन पाण्डेय
अप्रैल की झुलसा देने वाली गर्मी और आसमान से बरसती आग के बीच सिवान के महाराजगंज प्रखंड का ‘शूरवीर’ गांव आज अपनी प्यास बुझाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
विडंबना देखिए कि जिस गांव के हर आंगन में ‘नल से जल’ पहुंचाने के लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर दिए, वहां आज पाइपलाइन टूटी पड़ी है और टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
एक महीने से टंकियां सूखी, नल पर लंबी कतारें
वार्ड संख्या 2 की गलियों में बिछी पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण बताते हैं कि पिछले एक महीने से एक बूंद पानी सप्लाई नहीं हुआ है। भीषण उमस में महिलाएं दूर-दराज के चापाकलों पर कतार लगाने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि चापाकल में गंदा पानी आता है लेकिन वे उसे पीने को मजबूर हैं क्योंकि सरकारी टंकी बंद है।
अनुरक्षक को मानदेय नहीं मिलने से सप्लाई बंद
योजना की इस दुर्दशा के पीछे ‘अनुरक्षक बनाम जनप्रतिनिधि’ का विवाद मुख्य वजह है। बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘हर घर नल का जल ‘ योजना में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी अनुरक्षकों को दी गई है।
इस गांव के अनुरक्षक अमरेंद्र कुमार शाही का कहना है कि वे जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद अपने मानदेय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वे कहते हैं कि “बिना पैसे के सिस्टम कैसे चलेगा?” उन्होंने अपना काम रोक दिया है।
उन्होंने बीपीआरओ को गुहार लगाई है। दूसरी ओर, वार्ड सदस्या लक्ष्मीना देवी इन आरोपों को सिरे से खारिज करती हैं।
क्या बोले ग्रामीण ?
शूरवीर गांव के ग्रामीणों का अब धैर्य जवाब दे रहा है। उनकी मांग सीधी है कि उन्हें इन विवादों से कोई मतलब नहीं, उन्हें नलों में पानी चाहिए।
वार्ड सचिव रामकृपाल पाण्डेय स्पष्ट कहते हैं कि “विवाद चाहे जो भी हो, सजा आम जनता भुगत रही है।” वे कहते हैं कि सरकार बड़ी-बड़ी योजनाएं तो बना देती है, लेकिन उनके संचालन के लिए फंड का सही मैनेजमेंट नहीं होने से जनता तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता है।
