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महिला आरक्षण लागू कराने को लेकर लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर हो सकती हैं 850

नई दिल्ली | महिला आरक्षण लागू कराने को लेकर केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इसको लेकर रणनीति बनाने के लिए विपक्षी दलों ने कल बैठक बुलाई है।

उससे पहले मंगलवार को सरकार की ओर से सभी सांसदों को संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल का ड्राफ्ट भेजा गया है।

प्रस्तावित विधेयकों के अनुसार, लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।

नए परिसीमन के बाद इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने का लक्ष्य है।

इस योजना में सबसे बड़ा पेंच जनगणना के आधार को लेकर है। सरकार 2011 की जनगणना को सीटों के पुनर्गठन का आधार बनाने पर विचार कर रही है।

विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, इसका कड़ा विरोध कर रही है। सोनिया गांधी ने लेख के जरिए आरोप लगाया है कि “महिला आरक्षण की आड़ में सरकार का लक्ष्य ‘परिसीमन’ है। इससे वह लोकसभा सीटों की संख्या अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार बढ़ाना चाहती है।”

कांग्रेस ने विशेष सत्र को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों के बाद बुलाने की मांग रखी थी जिसे सरकार ने नहीं सुना।

जानकारों का मानना है कि 2011 की जनगणना को आधार बनाने से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है, जिस पर संसद में तीखी बहस तय है।

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