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सम्राट चौधरी को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका खारिज को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया

मेनिफेस्टो घोषणा के दौरान सिर्फ सम्राट चौधरी ने ही भाषण दिया।

मेनिफेस्टो घोषणा के दौरान सिर्फ सम्राट चौधरी ने ही भाषण दिया। (साभार फेसबुक)

नई दिल्ली |

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में निवर्तमान NDA सरकार में डिप्टी सीएम रहे सम्राट चौधरी से जुड़ी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उम्र की गलत जानकारी के आधार पर चुनावी हलफनामे को खारिज करने की मांग की गई थी।

यह याचिका हैदराबाद के एक निवासी ने दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के दो जजों वाली बेंच ने की और कहा कि “न्यायालय का समय बर्बाद न करें।”

याचिका में कहा गया कि सम्राट चौधरी ने उम्मीदवार के तौर पर अपनी उम्र का गलत जन्म प्रमाण पत्र दायर किया। साथ ही याचिकाकर्ता ने कहा कि 1995 में एक आपराधिक मामले में आरोपी होने पर उन्होंने अदालती कार्यवाही में अपनी उम्र 15 साल (नाबालिग) बतायी। साथ ही कहा गया है कि 1999 में चुनाव लड़ते समय सम्राट चौधरी ने अपनी उम्र 25 साल से ज्यादा बतायी थी। पर फिर बाद में 2020 और 2025 के चुनावी हलफनामों में गलत उम्र बताया गया।

याचिका में उनका नामांकन रद्द करने, FIR दर्ज करने और निर्वाचन आयोग को जांच के निर्देश देने की मांग की गई थी।

भाजपा का कहना है कि यह याचिका राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से दायर की गई थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, याचिकाकर्ता को अपना आरोप पत्र भी वापस लेना पड़ा।

प्रशांत किशोर ने उठाया था मुद्दा, बीजेपी ने नहीं दिया था जवाब

गौरतलब है कि इस याचिका में उठाया गया उम्र का मुद्दा सितंबर में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने उठाया था। उन्होंने बीजेपी को खुली चुनौती दी थी कि अगर इसमें कोई झूठ है तो उनके ऊपर मानहानि का दावा कर दें, या फिर बताएं कि उन्होंने एक ‘अपराधी’ को डिप्टी सीएम क्यों बनाया है? इस मामले पर बीजेपी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि उसकी चुप्पी पर भाजपा के ही नेता आरके सिंह ने सवाल उठाया था।

 

 

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