- RJD 143, INC 60, CPI(M) 20 और VIP ने 11 सीटों पर प्रत्याशी उतारे।
- नॉमिनेशन के अंतिम दिन भी महागठबंधन के दलों में सीटें नहीं बंट पाईं।
- आठ सीटों पर कांग्रेस, राजद, भाकपा(माले) और वीआईपी की सीधी टक्कर।
पटना| हमारे संवाददाता
बिहार में बदलाव का दावा करने वाला महा-गठबंधन नॉमिनेशन के आखिरी दिन 20 oct तक सहयोगी दलों में सीटें नहीं बांट सका। महागठबंधन ने नाराज होकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खुद को अलग कर लिया। हालात इतने खराब हैं कि गठबंधन के दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची तक अंतिम घंटों में जारी की है।
इस मामले में सबसे पीछे राजद रही, आखिरी दिन दोपहर 12 बजे फाइनल लिस्ट जारी की। जिससे साफ हुआ है कि इस चुनाव में राजद 143 सीटों पर लड़ेगी।
कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी ने 19 अक्तूबर की देर शाम को फाइनल लिस्ट निकाली। इस तरह कांग्रेस कुल 60 सीटों और वीआईपी 11 सीटों पर लड़ने की घोषणा कर चुकी है।
भाकपा(माले) ने जरूर 18 अक्तूबर को ही 20 सीटों की सूची जारी कर दी थी।
कांग्रेस 4 सीटों पर राजद और 3 पर माले से सीधे लड़ेगी
कांग्रेस का सहयोगी दलों के साथ सीधा झगड़ा दिख रहा है। छह सीटों पर कांग्रेस और राजद दोनों ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। कुटुंबा सीट से बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम खड़े हुए हैं, उनके खिलाफ राजद ने अपने वरिष्ठ नेता सुरेश पासवान को खड़ा करके चौंका दिया है।
इसके अलावा दोनों पार्टियों की सीधी लड़ाई कहलगांव , वैशाली, लालगंज सीटों पर है।
कांग्रेस ने भाकपा (CPIM) के खिलाफ चार सीटों से प्रत्याशी उतारे थे जिसमें से रोसड़ा सीट पर भाकपा के प्रत्याशी का पर्चा रद्द हो गया है। इस तरह अब बछवाड़ा, बिहारशरीफ और राजपाकर विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की टक्कर भाकपा से होगी। बिहार में भाकपा कुल 20 सीटों पर लड़ रही है जो पिछली बार से एक सीट ज्यादा है।
राजद ने वीआईपी के खिलाफ एक सीट पर प्रत्याशी उतारा
राजद और वीआईपी के बीच भी दो सीटों पर सीधी भिडंत थी पर एक सीट तारापुर पर वीआईपी समर्थित प्रत्याशी ने 19 अक्तूबर को भाजपा ज्वाइन कर ली। अब राजद और वीआईपी की फ्रेंडली फाइट एक विधानसभा सीट गौरा बौराम पर होनी है। इस चुनाव में वीआईपी ने 11 प्रत्याशियों की घोषणा 19 अक्तूबर को की है।
जिस तरह नॉमिनेशन के समय महागठबंधन में बिखराव दिखा है, यह देखना रोचक होगा कि ये दल संयुक्त प्रचार के लिए क्या समय रहते कोई रणनीति बना पाते हैं या ‘एकला चलो’ की राह पर चुनाव लड़ेंगे?

