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ईरान पर 10 साल बाद फिर से UN के प्रतिबंध, क्या असर होगा?

ईरान (सांकेतिक तस्वीर, इंटरनेट)

ईरान (सांकेतिक तस्वीर, इंटरनेट)

नई दिल्ली |

संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगे कई प्रतिबंधों को 2015 के बाद दोबारा लागू कर दिया है। इसे “snapback” (तीव्र लौटाव) कहा जा रहा है। 30 दिनों की विंडो के बाद प्रतिबंध 28 मई की रात 12 बजे (GMT) से प्रभावी हो गए क्योंकि ईरान ने न्यूक्लियर प्रतिबंधों का पालन नहीं किया।
इसके जवाब में, ईरान ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी में नियुक्त अपने राजदूतों को परामर्श के लिए तेहरान वापस बुलाया है। ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए ये एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ईरान ने रविवार को बयान जारी करके कहा कि ऐसे प्रस्तावों को मानने के लिए ईरान या अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश बाध्य नहीं हैं।
 “इस्लामी गणतंत्र ईरान राष्ट्रीय अधिकारों और हितों की पुरज़ोर रक्षा करेगा और ईरानी लोगों के अधिकारों या हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का उचित और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ऐसे प्रस्तावों को मानने के लिए ईरान या अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश बाध्य नहीं हैं।” – ईरान विदेश मंत्रालय
जानकारों ने प्रतिक्रिया का विश्लेषण करते हुए कहा कि ईरान ने बयान के जरिए परोक्ष रूप से उससे तेल खरीदने वाले देशों को भी कह दिया है कि वे इन प्रतिबंधों को न मानें।

UN प्रतिबंधों का दायरा

  • प्रतिबंध ईरान के न्यूक्लियर, सैन्य, बैंकिंग और शिपिंग क्षेत्रों पर लगेंगे।
  • नये प्रतिबंधों में हथियारों की बंदी, यूरेनियम संवर्धन पर रोक, परमाणु–संबंधित लेनदेन और अन्य आर्थिक उपाय शामिल हैं।

  • ये प्रतिबंध snapback प्रक्रिया के तहत लागू हुए हैं, जो 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रस्ताव संख्या 2231 के हिस्से के रूप में स्थापित थी।
  • पहले कई प्रतिबंध 2006–2010 के बीच लगाए गए थे, जिन्हें बाद में इस समझौते के अंतर्गत हटाया गया था।

UN जनरल असेंबली में भाषण देते ईरानी राष्ट्रपति। (क्रेडिट – flickr)

ईरानी पीएम का आश्वासन काम नहीं आया 
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने यूएन संबोधन में पिछले सप्ताह कहा था कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। ईरान पर दोबारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाने को उन्होंने “अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी” बताया है। 
“अगर न्यूक्लियर कार्यक्रम की चिंता का समाधान होता, तो हम आसानी से कर लेते। हम कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएंगे।” – यूएन में ईरानी राष्ट्रपति
तीन देशों से राजनयिक बुलाए 
प्रतिबंधों को लेकर ईरानी सरकार ने तीन यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी की उस कार्रवाई को “गैर-जिम्मेदाराना” कहा और कहा कि राजदूतों को “परामर्श” के लिए बुलाया गया है।
ईरानी प्रेस एजेंसियों के अनुसार, यह कदम उन देशों के खिलाफ राजनयिक प्रतिक्रिया का एक हिस्सा है जिन्होंने snapback को सक्रिय किया।
2015 में प्रतिबंध हटाए थे जो दोबारा लागू
ईरान पर JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) के तहत 2015 में UN प्रतिबंध निलंबित हुए थे। लेकिन ईरान के यूरेनियम संवर्धन के 60% तक पहुंच जाने और मिसाइल कार्यक्रम पर काम जारी रखने के चलते तीन यूरोपीय देशों (E3) ने स्नैपबैक सक्रिय किया।

ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)

50% कम तेल बेच पाएगा ईरान
ये प्रतिबंध ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा सकते हैं। तेल निर्यात 50% घट सकता है क्योंकि प्रतिबंधों के बाद भारत-चीन पर ईरान से तेल न खरीदने का दवाब बढ़ने की आशंका है जो इसके मुख्य ग्राहक हैं। 
ईरान की मुद्रा में 20% और गिरावट आने व महंगाई के  50% बढ़ जाने की संभावना जतायी जा रही है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने “सक्रिय प्रतिरोध” का संकल्प लिया है।

रूस-चीन ने प्रतिबंधों को अवैध बताया 

रूस और चीन ने इस प्रतिबंध पुनर्स्थापना को अवैध या असंगत बताया है और कहा कि इससे अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति कमजोर होगी। रूस-चीन ने प्रतिबंधों को लागू करने में 6 महीने की देरी का प्रस्ताव लाया लेकिन 9 देशों ने विरोध किया और इसे दोबारा कर दिया गया। 

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने ईरान को चेतावनी दी 

तीनों पश्चिमी देशों ने ईरान से कहा है कि वो संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध फिर से लागू किए जाने के बाद किसी भी आक्रामक कार्रवाई करने से बचे। तीनों देशों ने आरोप लगाया कि ईरान के “परमाणु कार्यक्रम विस्तार” और सहयोग की कमी इसका कारण बनी।

उनके पास “कोई विकल्प नहीं बचा” था और “आखिरी उपाय” के तौर पर इन कड़े कदमों को दोबारा लागू करना पड़ा।

तीनों देशों के संयुक्त बयान में ईरान से बातचीत जारी रखने को कहा गया है।

अमेरिका बोला – ईरान को दवाब में लाएं
US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा, “ईरान को सीधे वार्ता स्वीकार करनी चाहिए। स्नैपबैक ईरान के नेताओं पर दबाव है।” US ने ईरान के तेल खरीदने वाले चीनी संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए। 
इजरायल बोला- BRICS ईरान को जगह न दे
इजरायल ने स्नैपबैक का समर्थन किया। PM बेंजामिन नेतन्याहू ने UNGA में कहा, “ईरान को BRICS जैसे मंच में जगह देकर हम आतंकवाद को वैधता दे रहे हैं।” 
ईरान पर ऐक्शन को भारत कैसे देखे
  • भारत ईरान में $500 मिलियन निवेश से चाबहार पोर्ट बनाया, जो नए प्रतिबंधों के असर में आ सकता है।
  • US ने 19 सितंबर 2025 को चाबहार पोर्ट से व्यापार करने की छूट को रद्द कर दिया, जो भारत-अफगानिस्तान व्यापार को बाधित करेगा।
  • BRICS 2026 की अध्यक्षता भारत करेगा, इजरायल ने इस मंच पर ईरान को जगह न देने की बात कही है।

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