नई दिल्ली | अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया, ईरान और पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को ‘अमेरिका के लिए ख़तरा’ बताया है।
अहम बात यह है कि इस सूची में अमेरिकी के चिर प्रतिद्वंदियों के साथ पाकिस्तान को भी शामिल किया गया है जबकि हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन की पाक से नजदीकी देखी गई है।
पाकिस्तान की ‘मिसाइल क्षमता से ख़तरे’ से जुड़ी जानकारी अमेरिकी खुफिया विभाग ने संसदीय कमेटी को दी है। अमेरिकी दावे को पाक ने ख़ारिज़ कर दिया और भारत के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर आरोप लगाया है।
हालांकि अमेरिकी खुफिया विभाग ने मिसाइल कार्यक्रम से खतरे वाले देशों में भारत को शामिल नहीं किया है।
पाक के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, “हमारी रणनीतिक क्षमता पूरी तरह रक्षात्मक है, जिसका मक़सद राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना और दक्षिण एशिया में शांति व स्थिरता बनाए रखना है।”
साथ ही बयान में कहा गया है कि
“पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम अंतरमहाद्वीपीय दूरी से काफ़ी कम है। यह भारत के ख़िलाफ़ ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ की नीति पर आधारित है। इसके उलट, भारत की 12,000 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी वाली मिसाइल क्षमता का विकास क्षेत्रीय सुरक्षा से आगे जाता है। जो पड़ोस और बाहरी देशों के लिए चिंता का कारण है।”
अब देखना होगा कि भारत इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को पाक के मिसाइल कार्यक्रम की क्षमता को लेकर अब ज्यादा सतर्क हो जाना चाहिए।
