नई दिल्ली |
ईरान में तेज भंडार कॉम्प्लेक्स पर हमले के बाद वहां के मानवाधिकार संगठन रेड क्रेसेंट ने एसिड रेन की चेतावनी दी है।
रेड क्रेसेंट के हवाले से बीबीसी ने कहा है कि “तेल के गोदामों में धमाके से बड़ी मात्रा में ज़हरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फ़र और नाइट्रोजन ऑक्साइड हवा और बादलों में चले जाते हैं। अगर बारिश होती है तो यह बारिश बहुत ख़तरनाक होती है और इसमें तेज़ एसिडिक गुण होता है।”
रेड क्रेसेंट ने कहा, “एसिड रेन होने पर स्किन में जलन और फेफड़ों को गंभीर नुक़सान हो सकता है।” इस संगठन ने स्थानीय लोगों को अम्लीय वर्षा से सतर्क रहने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं। लोगों को कहा गया है कि आवश्यक न हो तो लोग घरों से बाहर न निकलें।
ईरानी सेना बोली- युद्ध छह महीने भी चला तो डटकर लड़ेंगे
ईरान ने कहा है कि उसकी सेना इतनी काबिल हैं कि अगर यह युद्ध इसी रफ्तार से अगले छह महीने भी चले तो वे डटकर सामने करेंगी।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGS) के प्रवक्ता मोहम्मद नैनी ने यह दावा फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी से किया है। उन्होंने यह भी कहा- ” ईरान ने अमेरिका और इजरायल के 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं और अब तक अभियानों में इस्तेमाल की गई मिसाइलें ज़्यादातर पहली और दूसरी पीढ़ी की हैं।
साथ ही उनका कहना है कि युद्ध के अगले चरण में ज़्यादा एडवांस और कम इस्तेमाल की जाने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा।
ईरान में अब तक 1300 लोगों की मौत, दस हजार विस्थापित
अलजजीरा का दावा है कि आठ दिन से जारी युद्ध में अब तक ईरान के 1300 लोगों की जान चली गई है और करीब 10 हजार लोग विस्थापित हो गए हैं। बता दें कि यह कतर सरकार की ओर से फंडिंड न्यूज मीडिया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है।
