- पश्चिमी चंपारण की रेलवे पुलिस ने एक भिखारी महिला के शव को रिक्शेवाले के जरिए नदी में फिंकवाने की साजिश की।
बेतिया | मनोज कुमार
हमारे समाज में गरीब की जिंदगी की कीमत नहीं है फिर मौत के बाद उसके शव की कीमत भला क्या होगी? शायद कुछ ऐसी ही मानसिकता पश्चिमी चंपारण की रेलवे पुलिसकर्मियों की रही होगी जो उन्होंने एक भिखारी महिला के शव को नदी में बहाकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की।
पर समाज में जिम्मेदार लोग भी हैं और ऐसे ही कुछ सजग लोगों ने शव को नदी में फेंके जाने की तैयारी कर रहे रिक्शेवाले को रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर स्थानीय पुलिस ने पूछताछ की तो रिक्शेवाले ने दावा किया कि वह ऐसा रेलवे थाना पुलिस के कहने पर करने आया है। अब इस मामले में पुलिस प्रशासन ने रेलवे पुलिस के खिलाफ जांच का आदेश दिया है।
नरकटियागंज रेलवे पर भीखती थी महिला
यह मामला पश्चिम चंपारण जिले में नरकटियागंज रेल परिसर का है, जहां एक भिखारी महिला की मौत हो गई। मृत महिला की आधिकारिक तौर पर पहचान होना बाकी है पर इसका नाम तेतरी देवी बताया जा रहा है जो मोतिहारी की रहने वाली थी। कई साल से वह रेलवे परिसर में अकेले भीख मांगकर अपना जीवन काट रही थी।
रिक्शे वाले का दावा- ‘रेलवे पुलिसकर्मी ने लाश नदी में बहाने को कहा’
शव को नदी में बहाए जाने की सूचना पर पहुंची शिकारपुर थाना पुलिस को रिक्शाचालक सूरदास और उसके साथी रामचंद्र से पूछताछ की। जिसमें दोनों ने बताया कि उन्हें कुछ रुपये देकर इस महिला के शव को हड़बोड़ा नदी में फेंकने का आदेश दिया गया था। रिक्शा चालक का दावा है कि रेल थाने के पुलिसकर्मी प्रेम कुमार ने उन्हें शव फेंकने को कहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या देखा?
चीनी मिल के पास हड़बोड़ा नदी के करीब खड़े कुछ युवकों ने रिक्शे वाले को कफन में बंद लाश को नदी में बहाने के लिए रिक्शे से उतारते हुए देखा। इस पर शोर मचाकर युवकों ने रिक्शेवाले को पकड़ लिया और पूछताछ करने लगे। एक युवक का कहना है कि हमने रिक्शेवाले को पकड़ा और तुरंत थाने में फोन लगाया, थोड़ी देर में पुलिस आ गई।
रेलवे पुलिस को फिर सौंपा शव, पोस्टमार्टम हुआ
इस मामले में हंगामा बढ़ने पर स्थानीय पुलिस ने रेलवे पुलिस को मौके पर बुलाया। इस महिला के शव को दोबारा रेलवे पुलिस को सौंपा गया, जिसने पोस्टमार्टम के लिए शव को बेतिया जीएमसीएच भेज दिया।
अज्ञात शव को लेकर क्या है कानूनी प्रक्रिया?
गौरतलब है कि किसी भी अज्ञात शव को लेकर गाइडलाइन है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को पहचान के लिए 48 घंटे तक सुरक्षित रखा जाता है। अगर इस अवधि में कोई आकर शव का क्लेम न करे तो पुलिस को अपने स्तर पर अंतिम संस्कार कराना होता है, जिसमें अक्सर सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद ली जाती है।
रेल पुलिस पर सवाल, जांच शुरू
मुजफ्फरपुर रेल एसपी वीणा कुमारी ने मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

