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निर्भया फंड को लेकर गृह मंत्री से सवाल पूछकर पीछे क्यों हटे बीजेपी सांसद?

निर्भया गैंगरेप केस ने महिला हिंसा के खिलाफ कड़े कानून बनाए पर आज भी इनका जमीनी क्रियान्वयन सवालों के घेरे में है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली |
बलात्कार पीड़ितों (Rape Victims) की मदद से जुड़े निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) को लेकर राज्यसभा में 10 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण सवाल पूछने से ठीक पहले BJP सांसद ने उसे वापस ले लिया। यह सवाल गृह मंत्री अमित शाह से पूछे जाने के लिए लिस्ट हुआ था। बिना कोई कारण बताए महत्वपूर्ण मुद्दे पर सवाल वापस लिए जाने पर कांग्रेस सांसद नाराज हुए और राज्यसभा से वॉकआउट करके अपना विरोध दर्ज कराया है। इस अहम खबर को अंग्रेजी के प्रमुख अखबारों ने कवर किया जबकि हिन्दी अखबारों ने इसे जगह नहीं दी है।   
झारखंड के MP ने सवाल पूछकर वापस लिया 
10 दिसंबर को राज्यसभा कार्यवाही के दौरान झारखंड से BJP सांसद आदित्य प्रसाद ने एक सवाल लिस्ट कराया था जो गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित था। यह सवाल उस कैटेगरी के तहत पूछा गया था जिसमें मंत्री को सदन में मौखिक रूप से जवाब देना अनिवार्य है। ऐसे सवालों को ‘स्टार्ड क्वेश्चन’ (Starred Question) कहा जाता है। MP आदित्य प्रसाद के स्टार्ड क्वेश्चन का नंबर 107 था। 106 नंबर का प्रश्न पूछे जाने के बाद जब स्पीकर सीधे 108 नंबर प्रश्न पर पहुंच गए तो विपक्षी सांसदों ने इस पर स्पीकर से पूछा। तब स्पीकर ने बताया कि संबंधित सांसद ने सवाल वापस ले लिया है तो हंगामा हुआ। 
अमित शाह से क्या पूछना चाहते थे सांसद  
सांसद ने गृह मंत्री से यह जानना चाहा था कि क्या सरकार नए आपराधिक कानूनों की अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (Central Forensic Science Laboratories) का विस्तार कर रही है? साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या निर्भया फंड के तहत फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कोई कदम उठाए गए हैं? गौरतलब है कि सांसद आदित्य प्रसाद ने सवाल वापसी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया।
चेयरमैन बोले- सवाल वापस लेना सांसद का अधिकार
स्टार्ड क्वेश्चन नंबर 107 को वापस लिए जाने को लेकर विपक्ष ने विरोध किया और कहा कि इस तरह गलत परंपरा डाली जा रही है। इस पर  चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने रूल 53 का हवाला दिया और कहा कि “किसी सांसद का सवाल वापस लेना उनका अधिकार है, अगर कोई और सांसद भी सवाल वापस लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं..मैं हस्तक्षेप नहीं कर सकता।”
केंद्रीय मंत्री जवाब देने लगे तो स्पीकर ने रोका.. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्भया फंड से जुड़े सवाल को वापस लिए जाने को लेकर जब विपक्षी सांसद सवाल उठाने लगे तो केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू जवाब देने को उठे। इस पर चेयरमैन ने उन्हें रोका और कहा कि “जवाब देने की कोई जरूरत नहीं है।” इससे नाराज कांग्रेस सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस नेता ने कहा, “निर्भया फंड पर सवाल उठाने वाले खुद ही पीछे हट गए, यह लोकसभा-राज्यसभा की परंपरा के खिलाफ है।”

निर्भया फंड पर मिला लिखित जवाब 

जिस दिन राज्यसभा में गृहमंत्री से निर्भया फंड पर भाजपा के सांसद ने मौखिक प्रश्न पूछकर उसे वापस ले लिया था, उसी दिन निर्भया फंड पर एक लिखित जवाब जारी किया गया। राज्यसभा में 10 दिसंबर को निर्भया फंड पर गृह व बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की ओर से लिखित जवाब दिया गया। इसके मुताबिक, पिछले 5 साल (2020-2025) में 3,300 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। हालांकि इस बजट के उपयोग को लेकर कोई जानकारी स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह जानकारी भी नहीं है कि फॉरेंसिक लैब के विस्तार को लेकर कितना फंड उपयोग हुआ है।
क्या है निर्भया फंड 
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में बहुचर्चित गैंग रेप हुआ, जिसे निर्भया नाम दिया गया। देश और विदेश में इसे लेकर बहुत विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इसके बाद 2013 में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को कम करने, बलात्कार पीड़ितों की सहायता और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने निर्भया फंड स्थापित किया।
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