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Bihar : डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के ‘सम्राट अशोक व गौतम बुद्ध की मुलाकात’ बयान की क्यों हो रही चर्चा

मेनिफेस्टो घोषणा के दौरान सिर्फ सम्राट चौधरी ने ही भाषण दिया।

मेनिफेस्टो घोषणा के दौरान सिर्फ सम्राट चौधरी ने ही भाषण दिया। (साभार फेसबुक)

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के सम्राट अशोक की जयंती के मौके पर दिए गए एक बयान ने चर्चा पकड़ ली है। पटना में रामनवमी व सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री की राज्यव्यापी समृद्धि यात्रा का समापन समारोह हुआ।

बापू सभागार में मंच से बोलते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मौर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक और भगवान गौतम बुद्ध की ‘मुलाकात’ का जिक्र कर दिया। हालांकि सभागार में बैठे किसी भी व्यक्ति या एंकर ने इसे दुरुस्त नहीं कराया। पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर टिप्पणियां की हैं।

सम्राट चौधरी बोले,

“सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध की जब मुलाकात हुई, तब उनकी दी गई शिक्षाओं ने सम्राट अशोक को बदल दिया।”

बापू सभागार में बोलते हुए सम्राट चौधरी एक ऐतिहासिक तथ्य को गलत बता गए जो चर्चा में है।

उनके इस कथन के बाद इतिहासकार व राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए याद दिलाया है कि इन दोनों महान विभूतियों के कालखंड के बीच करीब 260 वर्षों का अंतर रहा है, ऐसे में दोनों की मुलाकात होना संभव नहीं है।

इस बयान को लेकर पूर्णिया से कांग्रेस समर्थित सांसद पप्पू यादव ने ट्वीट करके चुटकी लेते हुए कहा है कि-

“इनके (सम्राट चौधरी) ज्ञान पर सवाल नहीं खड़ा किया जाना चाहिए डिप्टी CM साहब भी उस मुलाक़ात में साथ थे। वही इन्हें भी महात्मा बुद्ध से करुणा और ज्ञान प्राप्त हुआ था। अज्ञानता का सम्राट नहीं, नवीन ज्ञान के चौधरी हैं अपने डिप्टी CM साहब!”

पप्पू यादव, (फाइल फोटो)

क्या था सम्राट का पूरा बयान?

दरअसल, सम्राट चौधरी बापू सभागार में बोलते हुए कह रहे थे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सभागार का नाम सम्राट अशोक कन्वेंशन हॉल दिया है, इसके लिए वे उन्हें बधाई देते हैं। फिर उन्होंने कहा कि “सम्राट अशोक ने स्वर्णिम काल दिया इस भारत को, भारत उन्नति की ओर गया। इसके पहले भी कई राजा हुए, लेकिन कभी भी अखंड भारत का सपना साकार नहीं हो पाया।”

फिर उन्होंने कहा, “लेकिन सम्राट अशोक का दो चेहरा है साथियों। एक चंड अशोक दिखा, जिसने सारी मर्यादा को लांघा और इस अखंड भारत की कल्पना को सरजमीं पर लाने का काम किया। और दूसरा सम्राट अशोक का चेहरा दिखा, जब गौतम बुद्ध से उनकी मुलाकात हुई। भगवान गौतम बुद्ध ने जो शिक्षा दिया, उनकी जो करुणा थी, उस करुणा के साथ जब वो खड़ा हुए, तो दुनिया में शांति का संदेश भी सम्राट अशोक ने दिया।”

क्या कहते हैं ऐतिहासिक तथ्य?

इतिहासकारों के अनुसार, सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी और इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन उनसे साक्षात मुलाकात नहीं की क्योंकि दोनों अलग-अलग काल में पैदा हुए।

भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण (देहांत) लगभग 483 ईसा पूर्व में हुआ था। इसके करीब 179 साल बाद सम्राट अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व में हुआ।

सोशल मीडिया पर चर्चा – जुबान फिसली..

सोशल मीडिया कुछ लोग इसे ‘स्लिप ऑफ टंग’ (जुबान फिसलना) मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे इतिहास के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।

बिहार के एक पत्रकार पुष्य मित्र ने फेसबुक पर लिखा, “सम्राट चौधरी बिहार के उप मुख्यमंत्री हैं। वे उस जाति से आते हैं जो खुद को सम्राट अशोक का वंशज कहती है। मगर अफसोस इन्हें पता नहीं है कि सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध कभी एक दूसरे से मिले नहीं थे। न जानना कोई अपराध नहीं है। मगर इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की टीम में किसी ऐसे व्यक्ति का न होना बड़ा अपराध है जो उन्हें इतनी साधारण बात भी नहीं बता सके। यह दुख की बात है।”

एक और पत्रकार सुमन भारद्वाज ने कहा कि ‘संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के सार्वजनिक भाषणों में ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिकता बहुत जरूरी है क्योंकि लोग उनका यकीन करते हैं।’

एक और पत्रकार आशुतोष कुमार पांडे ने कहा कि “राजनीति, पत्रकारिता और वकालत.. ये तीन प्रोफेशन ऐसे हैं, जिसमें जीवन भर पढ़ना पड़ता है लेकिन देश के बड़े- बड़े नेता बिना तथ्यों के बहुत कुछ बोल जाते हैं। सम्राट चौधरी तो महज बानगी हैं।”

बिहार सरकार मनाती है अशोक जयंती

बिहार में सम्राट अशोक जयंती को चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाता है। बिहार सरकार ने 2015-16 से ही सम्राट अशोक की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।

इसी कारण बिहार में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी रहता है। इस साल 26 मार्च को इसे मनाया गया।

हिंदू पंचांग और पुरानी परंपराओं के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘अशोक अष्टमी’ के रूप में मनाया जाता है।

इसी दिन ‘अशोक अष्टमी’ का व्रत भी रखा जाता है, जिसे दुखों से मुक्ति (अ-शोक) पाने वाला दिन माना जाता है।

बिहार सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसी तिथि को सम्राट अशोक की जयंती मनाने के लिए निर्धारित किया है।

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