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रिपोर्टर की डायरी

Bihar : डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के ‘सम्राट अशोक व गौतम बुद्ध की मुलाकात’ बयान की क्यों हो रही चर्चा

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मेनिफेस्टो घोषणा के दौरान सिर्फ सम्राट चौधरी ने ही भाषण दिया।
सम्राट चौधरी

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के सम्राट अशोक की जयंती के मौके पर दिए गए एक बयान ने चर्चा पकड़ ली है। पटना में रामनवमी व सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री की राज्यव्यापी समृद्धि यात्रा का समापन समारोह हुआ।

बापू सभागार में मंच से बोलते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मौर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक और भगवान गौतम बुद्ध की ‘मुलाकात’ का जिक्र कर दिया। हालांकि सभागार में बैठे किसी भी व्यक्ति या एंकर ने इसे दुरुस्त नहीं कराया। पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर टिप्पणियां की हैं।

सम्राट चौधरी बोले,

“सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध की जब मुलाकात हुई, तब उनकी दी गई शिक्षाओं ने सम्राट अशोक को बदल दिया।”

बापू सभागार में बोलते हुए सम्राट चौधरी एक ऐतिहासिक तथ्य को गलत बता गए जो चर्चा में है।

उनके इस कथन के बाद इतिहासकार व राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए याद दिलाया है कि इन दोनों महान विभूतियों के कालखंड के बीच करीब 260 वर्षों का अंतर रहा है, ऐसे में दोनों की मुलाकात होना संभव नहीं है।

इस बयान को लेकर पूर्णिया से कांग्रेस समर्थित सांसद पप्पू यादव ने ट्वीट करके चुटकी लेते हुए कहा है कि-

“इनके (सम्राट चौधरी) ज्ञान पर सवाल नहीं खड़ा किया जाना चाहिए डिप्टी CM साहब भी उस मुलाक़ात में साथ थे। वही इन्हें भी महात्मा बुद्ध से करुणा और ज्ञान प्राप्त हुआ था। अज्ञानता का सम्राट नहीं, नवीन ज्ञान के चौधरी हैं अपने डिप्टी CM साहब!”

तीन फरवरी को मीडिया के सामने पप्पू यादव ने नीट मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के सक्रिय होने की बात कही थी, जो उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

पप्पू यादव, (फाइल फोटो)

क्या था सम्राट का पूरा बयान?

दरअसल, सम्राट चौधरी बापू सभागार में बोलते हुए कह रहे थे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सभागार का नाम सम्राट अशोक कन्वेंशन हॉल दिया है, इसके लिए वे उन्हें बधाई देते हैं। फिर उन्होंने कहा कि “सम्राट अशोक ने स्वर्णिम काल दिया इस भारत को, भारत उन्नति की ओर गया। इसके पहले भी कई राजा हुए, लेकिन कभी भी अखंड भारत का सपना साकार नहीं हो पाया।”

फिर उन्होंने कहा, “लेकिन सम्राट अशोक का दो चेहरा है साथियों। एक चंड अशोक दिखा, जिसने सारी मर्यादा को लांघा और इस अखंड भारत की कल्पना को सरजमीं पर लाने का काम किया। और दूसरा सम्राट अशोक का चेहरा दिखा, जब गौतम बुद्ध से उनकी मुलाकात हुई। भगवान गौतम बुद्ध ने जो शिक्षा दिया, उनकी जो करुणा थी, उस करुणा के साथ जब वो खड़ा हुए, तो दुनिया में शांति का संदेश भी सम्राट अशोक ने दिया।”

क्या कहते हैं ऐतिहासिक तथ्य?

इतिहासकारों के अनुसार, सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी और इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन उनसे साक्षात मुलाकात नहीं की क्योंकि दोनों अलग-अलग काल में पैदा हुए।

भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण (देहांत) लगभग 483 ईसा पूर्व में हुआ था। इसके करीब 179 साल बाद सम्राट अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व में हुआ।

सोशल मीडिया पर चर्चा – जुबान फिसली..

सोशल मीडिया कुछ लोग इसे ‘स्लिप ऑफ टंग’ (जुबान फिसलना) मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे इतिहास के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।

बिहार के एक पत्रकार पुष्य मित्र ने फेसबुक पर लिखा, “सम्राट चौधरी बिहार के उप मुख्यमंत्री हैं। वे उस जाति से आते हैं जो खुद को सम्राट अशोक का वंशज कहती है। मगर अफसोस इन्हें पता नहीं है कि सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध कभी एक दूसरे से मिले नहीं थे। न जानना कोई अपराध नहीं है। मगर इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की टीम में किसी ऐसे व्यक्ति का न होना बड़ा अपराध है जो उन्हें इतनी साधारण बात भी नहीं बता सके। यह दुख की बात है।”

एक और पत्रकार सुमन भारद्वाज ने कहा कि ‘संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के सार्वजनिक भाषणों में ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिकता बहुत जरूरी है क्योंकि लोग उनका यकीन करते हैं।’

एक और पत्रकार आशुतोष कुमार पांडे ने कहा कि “राजनीति, पत्रकारिता और वकालत.. ये तीन प्रोफेशन ऐसे हैं, जिसमें जीवन भर पढ़ना पड़ता है लेकिन देश के बड़े- बड़े नेता बिना तथ्यों के बहुत कुछ बोल जाते हैं। सम्राट चौधरी तो महज बानगी हैं।”

बिहार सरकार मनाती है अशोक जयंती

बिहार में सम्राट अशोक जयंती को चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाता है। बिहार सरकार ने 2015-16 से ही सम्राट अशोक की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।

इसी कारण बिहार में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी रहता है। इस साल 26 मार्च को इसे मनाया गया।

हिंदू पंचांग और पुरानी परंपराओं के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘अशोक अष्टमी’ के रूप में मनाया जाता है।

इसी दिन ‘अशोक अष्टमी’ का व्रत भी रखा जाता है, जिसे दुखों से मुक्ति (अ-शोक) पाने वाला दिन माना जाता है।

बिहार सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसी तिथि को सम्राट अशोक की जयंती मनाने के लिए निर्धारित किया है।

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प्रदेश रिपोर्ट

मुंगेर की ढोल पहाड़ी के लोगों को बंधी उम्मीद : पूजा करने आए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बोले- सड़क बनवाएंगे

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मुंगेर की ढोल पहाड़ी
  • ढोल पहाड़ी से सुल्तानगंज तक मुख्य सड़क बनने का ऐलान।

मुंगेर | प्रशांत कुमार

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर असरगंज प्रखंड के चोर गांव पंचायत पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ढोल पहाड़ी स्थित दुर्गा मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में उनके आगमन पर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया।सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में क्षेत्र में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। चोर गांव पंचायत को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चारों दिशाओं में सड़कों का जाल बिछाया गया है, जिससे लोगों की दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ी है।उन्होंने कहा कि ढोल पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को सुल्तानगंज आने-जाने में लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए ढोल पहाड़ी से सुल्तानगंज तक मुख्य सड़क के निर्माण का निर्णय लिया गया है, जिसे शीघ्र ही धरातल पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा इस क्षेत्र में लोगो को रोजगार कैसे बढे और पर्यटन को कैसे बढ़ावा मिले इसको लेकर पर्यटन विभाग को भारत सरकार से सहमति ली जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने ढोल पहाड़ी के समग्र विकास की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पहाड़ी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ी रही है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों का ठिकाना हुआ करता था। ऐसे महत्वपूर्ण स्थल के संरक्षण एवं विकास के लिए पुरातत्व विभाग से अनुमति प्राप्त कर वैज्ञानिक तरीके से कार्य कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों की विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।उपमुख्यमंत्री की घोषणाओं से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोगों ने विकास कार्यों को लेकर उम्मीद जताई है।

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चुनावी डायरी

बिहार : नीतीश की विदाई पर भावुक हुए मंत्री अशोक चौधरी, बोले- ‘मुश्किल तो है और मुसीबत भी है’

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कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी, बिहार भवन निर्माण विभाग

​पटना | हमारे संवाददाता

20 साल से बिहार में शासन चला चुके और दसवीं बार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की तारीख नज़दीक आते ही उनके करीबी नेताओं की भावुकता मीडिया के सामने आने लगी है।

नीतीश सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी मीडिया के सामने भावुक हो गए। जब अशोक चौधरी से पूछा गया कि सदन में अब उन्हें कौन गाइड करेगा? इस पर उन्होंने रुंधे गले से कहा— “मुश्किल तो है और मुसीबत भी है।”

गौरतलब है कि अशोक चौधरी पहले बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उसके बाद जदयू में शामिल हुए और नीतीश कुमार के वफादार बेहद करीबी नेता बन गए। वे जेडीयू के पूर्व कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा-

“निश्चित तौर पर यह फैसला हम सबको बहुत खलेगा। कौन नहीं जानता कि नीतीश कुमार ने बिहार के लिए क्या कुछ नहीं किया? कई लोगों के वीडियो वायरल हुए, आपने देखा होगा। यह हम सबके लिए बहुत ही भावुक पल है, लेकिन अंततः यह नीतीश कुमार जी का अपना फैसला है और इसमें हम लोग कुछ नहीं कर सकते।”
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निशांत सीएम मैटीरियल हैं..

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को ‘बिहार का भविष्य’ बताने वाले शहर में लग रहे पोस्टरों के बारे में जब उनसे पूछा गया तो पलटकर सवाल करते हुए बोले- “क्यों नहीं हो सकता? हमारे कार्यकर्ता चाहते हैं। निशांत कुमार के बारे में सबको पता है। बिहार में वो लोग मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं जो मैट्रिक तक पास नहीं हैं, तो फिर निशांत क्यों नहीं? निशांत तो पढ़े-लिखे और योग्य हैं।”

30 मार्च को इस्तीफा दे सकते नीतीश कुमार

गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नियम मुताबिक राज्यसभा सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना है, यह अवधि 30 मार्च को समाप्त हो रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि वे इसी तारीख को इस्तीफा देंगे।

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चुनावी डायरी

‘नीतीश कुमार को दिल्ली भेजने से JDU ही नहीं BJP को भी नुकसान होगा, ये वादाखिलाफी है’ : पूर्व सांसद आनंद मोहन

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पूर्व सांसद व बाहुबली आनंद मोहन

सहरसा | मुकेश कुमार

अब यह साफ हो चुका है कि राज्यसभा के लिए चुने गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च तक इस्तीफा देंगे। इस बीच पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर असहमति जताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है।

सहरसा से संबंध रखने वाले दो बार सांसद रह चुके बाहुबली आनंद मोहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा,

“यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि यह मुख्यमंत्री की निजी इच्छा है। फैसला थोपा गया हो या स्वयं नीतीश कुमार का है, मैं और मेरे जैसे लाखों लोग इससे पूर्णतः इससे असहमत हैं। इससे जदयू को नुकसान तो होगा ही, लेकिन उससे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होगा।”

गौरतलब है कि आनंद मोहन, जदयू के सदस्य नहीं हैं पर वे और उनका परिवार पार्टी के साथ जुड़ा रहा है।

‘जदयू-बीजेपी पर असर, विपक्ष को फायदा होगा’

आनंद मोहन का कहना है कि इससे जदयू के लव-कुश समीकरण (कुर्मी-कोइरी) पर असर पड़ेगा और विपक्ष को इसका फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि

जिन कथित चाणक्यों, मंत्रणाकारों और योजनाकारों ने इस घटनाक्रम को अंजाम दिया है, उसने जदयू की तो मिट्टी पलीद तो की ही ही, भाजपा काे भी भारी नुकसान पहुंचाया है जो आने वाले समय में सामने आएगा। मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सांसद बनना सीधा डिमोशन है।

‘नीतीश के फैसले से जदयू में भगदड़’

आनंद मोहन ने कहा कि नीतीश कुमार की इस घोषणा के बाद जदयू नेता भौचक्के थे और दूसरी पार्टियों की ओर देख रहे थे। ये अच्छा हुआ कि तुरंत निशांत कुमार को जदयू में लाया गया।

साथ ही बोले कि पद छोड़ने की घोषणा के बाद समृद्धि यात्रा पर निकलकर नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं व आम लोगों के गुस्से को कम कर दिया वरना स्थिति अलग होती।

‘राजनीतिक पाप क्यों करना पड़ा?’

उन्होंने सवाल किया कि “हाल में हुए विधानसभा चुनाव में जब ‘फिर से नीतीश कुमार’ का नारा देकर जनता से वोट मांगा गया था तो फिर अचानक कौन सा पहाड़ टूट पड़ा कि चार महीने के अंदर यह ‘राजनीतिक पाप’ करना पड़ा?”

उन्होंने कहा कि इससे शोषितों, वंचितों, गरीबों में बहुत गलत संदेश गया है। लोग इसे राजनीतिक विश्वासघात और वादाखिलाफी मानते हैं।

‘अब संगठन पर पूरी नज़र रखें नीतीश कुमार’

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि अब जबकि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा ही रहे हैं तो वे पार्टी संगठन पर अपनी पूरी कमान रखें, ताकि कार्यकर्ताओं में मैसेज जाए कि फैसले वही ले रहे हैं। अब पार्टी में कोई कार्यकारी अध्यक्ष नहीं होना चाहिए।

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