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Trump की नीतियों के बीच भारत का न्यूजीलैंड से Free Trade Agreement

भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। (तस्वीर - सांकेतिक)

भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। (तस्वीर - सांकेतिक)

नई दिल्ली |
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहा है, इस चुनौती के बीच भारत ने अपने वैश्विक व्यापार को अन्य देशों की ओर मोड़ने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज यानी 22 दिसंबर को भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा हुई है। अहम बात यह है कि इस साल 2025 में यह तीसरा मौका है जब भारत ‘कर मुक्त व्यापार’ का समझौता करने में सफल रहा। इससे पहले ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो चुका है और यूरोपीय संघ के साथ समझौते को लेकर वार्ता जारी है।

भारत-न्यूजीलैंड : सबसे तेजी से हुआ समझौता 

दोनों देशों के बीच बीते मार्च में वार्ता शुरू हुई और सिर्फ 9 महीनों में समझौता हो गया, यह किसी विकसित देश के साथ भारत का सबसे तेजी से हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। इसके मुख्य प्रावधान- 

1. न्यूजीलैंड में बिना टैरिफ के बिकेंगे भारतीय उत्पाद 

न्यूजीलैंड के लिए होने वाले भारतीय निर्यात पर जीरो ड्यूटी होगी यानी न्यूजीलैंड में सभी भारतीय सामानों पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगेगा। 

2. न्यूजीलैंड के 95% उत्पादों को भारतीय बाजारों में छूट 

भारत आने वाले 95% सामानों पर शुल्क कम या खत्म हो गया है। FTA लागू होने के पहले दिन से ही आधे से ज्यादा सामानों पर Duty Free रहेगी

3. भारतीय पेशेवरों के लिए आसान एंट्री

FTA से मोबिलिटी और वीजा के मामले में भी भारत को लाभ होगा। भारतीय छात्रों, पेशेवरों और स्किल्ड वर्कर्स के लिए न्यूजीलैंड में आसान एंट्री होगी। न्यूजीलैंड में Temporary Employment Entry Visa (5,000 तक, 3 साल तक रहने की सुविधा)।

4. भारत में भारी निवेश का वादा 

  • न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में $20 बिलियन निवेश करेगा, व्यापार समझौते में यह वादा किया गया है।
  • 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य दोनों देशों ने लिया है, वर्तमान में $1.3 बिलियन मर्चेंडाइज ट्रेड है।

FTA पर औपचारिक हस्ताक्षर अगले साल – मीडिया रिपोर्टर्स के मुताबिक, इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 2026 की पहली तिमाही में होंगे।

पेंच : न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी जरूरी

न्यूजीलैंड की व्यवस्था के मुताबिक, इस मुक्त व्यापार समझौते पर उनकी संसद में मंजूरी आवश्यक है। हालांकि भारत में कैबिनेट के अप्रूवल से ही समझौता लागू हो जाएगा।  
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