- रोहतास जिले में नीलगायों के चलते फसल बर्बाब हो रही।
- किसानों को अब तक नहीं मिला सुरक्षा के कानून का लाभ।
- डीएफओ बोले- परमीशन के बाद ‘शूट’ की जा सकती हैं।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में नीलगायों से फसल नुकसान की समस्या से किसान कई साल से परेशान हैं पर आज तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।
अब फिर जिला वन पदाधिकारी ने दोहराया है कि नीलगायों को किसानों के आवेदन पर मारा जा सकता है ताकि फसलों पर उनका खतरा कम हो जाए।
लेकिन रोहतास जिले में आज तक किसी किसान ने नीलगाय को मारने के लिए जिला प्रशासन के पास आवेदन नहीं दिया है। इससे साफ होता है कि नियम सिर्फ कागजों में दर्ज हैं, जमीन पर उनका लाभ लेने के लिए किसानों को जागरुक नहीं किया गया है।
नतीजतन किसानों की अपनी फसल बचाने के लिए दिनरात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। फिर भी झुंड में आने वाली नीलगाय उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
नीलगाय की समस्या को देखते हुए साल 2015 में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए इसे वर्मिन की श्रेणी में डाल दिया था। इसका मतलब था कि नीलगाय अब संरक्षित जानवर नहीं रहे, अगर ये फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो किसान इन्हें बिना वन्य जीव कानून के उल्लंघन के इन्हें मार सकते हैं। यह फैसला किसानों की फसल सुरक्षा के लिए लिया गया था। पर जमीन पर यह लागू नहीं हुआ है।
जिला वन पदाधिकारी स्टालिन फीडल कुमार ने बताया कि सरकार ने 2022 में ही वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की हत्या के लिए पंचायत मुखिया को अधिकृत कर दिया है।
यानी पीड़ित किसान नीलगाय को मारने के लिए अपने पंचायत मुखिया को लिखित आवेदन देंगे। मुखिया स्थल का निरीक्षण कर नीलगायों की हत्या का आदेश जारी करेंगे।
इसमें नियम है कि नीलगाय को मारने का काम केवल वन विभाग की ओर से लिस्टेड शूटर ही करेंगे। शूटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अन्य जानवरों या लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।
DFO ने कहा- बिना अनुमति या गाइडलाइन के नीलगाय मारने पर वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
वन पदाधिकारी का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों से फसल क्षति के लिए मुआवजे का प्रावधान है। किसान नजदीकी रेंज ऑफिस में सूचना देंगे। वन विभाग की टीम राजस्व अधिकारी के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करेगी और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
पर असल हालात यह हैं कि किसानों को नीलगाय के फसल खराब करने को लेकर कोई मुआवजा नहीं मिलता है।

