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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास (बिहार): DFO बोले- नीलगायों से फसल बचाने के लिए शूटर मिलेंगे; पर 3 साल पुराना नियम सिर्फ कागजी

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  • रोहतास जिले में नीलगायों के चलते फसल बर्बाब हो रही।
  • किसानों को अब तक नहीं मिला सुरक्षा के कानून का लाभ।
  • डीएफओ बोले- परमीशन के बाद ‘शूट’ की जा सकती हैं।

सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव

बिहार के रोहतास जिले में नीलगायों से फसल नुकसान की समस्या से किसान कई साल से परेशान हैं पर आज तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।
अब फिर जिला वन पदाधिकारी ने दोहराया है कि नीलगायों को किसानों के आवेदन पर मारा जा सकता है ताकि फसलों पर उनका खतरा कम हो जाए। 
लेकिन रोहतास जिले में आज तक किसी किसान ने नीलगाय को मारने के लिए जिला प्रशासन के पास आवेदन नहीं दिया है। इससे साफ होता है कि नियम सिर्फ कागजों में दर्ज हैं, जमीन पर उनका लाभ लेने के लिए किसानों को जागरुक नहीं किया गया है।
नतीजतन किसानों की अपनी फसल बचाने के लिए दिनरात खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। फिर भी झुंड में आने वाली नीलगाय उनकी फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
नीलगाय की समस्या को देखते हुए साल 2015 में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए इसे वर्मिन की श्रेणी में डाल दिया था। इसका मतलब था कि नीलगाय अब संरक्षित जानवर नहीं रहे, अगर ये फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो किसान इन्हें बिना वन्य जीव कानून के उल्लंघन के इन्हें मार सकते हैं। यह फैसला किसानों की फसल सुरक्षा के लिए लिया गया था। पर जमीन पर यह लागू नहीं हुआ है। 

 

जिला वन पदाधिकारी स्टालिन फीडल कुमार ने बताया कि सरकार ने 2022 में ही वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की हत्या के लिए पंचायत मुखिया को अधिकृत कर दिया है।

यानी पीड़ित किसान नीलगाय को मारने के लिए अपने पंचायत मुखिया को लिखित आवेदन देंगे। मुखिया स्थल का निरीक्षण कर नीलगायों की हत्या का आदेश जारी करेंगे।

इसमें नियम है कि नीलगाय को मारने का काम केवल वन विभाग की ओर से लिस्टेड शूटर ही करेंगे। शूटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अन्य जानवरों या लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।

DFO ने कहा- बिना अनुमति या गाइडलाइन के नीलगाय मारने पर वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।

वन पदाधिकारी का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों से फसल क्षति के लिए मुआवजे का प्रावधान है। किसान नजदीकी रेंज ऑफिस में सूचना देंगे। वन विभाग की टीम राजस्व अधिकारी के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करेगी और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। 

पर असल हालात यह हैं कि किसानों को नीलगाय के फसल खराब करने को लेकर कोई मुआवजा नहीं मिलता है।
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बांका में पुलिस लाइन का खाना बना जहर! 100 से अधिक जवान अचानक पड़े बीमार

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बांका | दीपक कुमार

बिहार के बांका जिला से शुक्रवार को एक बेहद चौंकाने वाली और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ पुलिस लाइन में परोसा गया खाना जवानों के लिए मानो जहर साबित हो गया।

जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन मेस में दोपहर के भोजन के रूप में जवानों को फ्राइड राइस और चना छोला परोसा गया था। ड्यूटी से लौटे जवानों ने जैसे ही यह खाना खाया, कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

देखते ही देखते 100 से अधिक पुलिस जवानों को पेट दर्द, उल्टी, जी मिचलाने और दस्त जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे पुलिस लाइन परिसर में अफरा-तफरी मच गई और एम्बुलेंस के सायरन लगातार गूंजने लगे।

बीमार पड़े सभी जवानों को तुरंत इलाज के लिए बांका सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में भी हड़कंप मच गया और बेड कम पड़ गए। इसके बाद आनन-फानन में अतिरिक्त बेड और डॉक्टरों की व्यवस्था की गई।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल सभी जवानों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, उन्हें सलाइन चढ़ाया जा रहा है और डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

इस घटना के बाद पुलिस लाइन मेस में परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जवानों के बीच भी इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। परोसे गए भोजन के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर जवानों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।

अधिकारियों ने साफ कहा है कि यदि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले जवानों के स्वास्थ्य के साथ इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हो गई?

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रोहतास (बिहार) : 4 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए हो रहा exam, एडमिट कार्ड में लगा दी कुत्ते का फोटो!

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रोहतास जिले के परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड पर कुत्ते का फोटो लगा दिया गया है।
  • 15 मार्च को होनी है भर्ती परीक्षा, एडमिट कार्ड पर कुत्ते की फोटो।
  • रोहतास जिले के उम्मीदवार के एडमिट कार्ड में बड़ी गलती।
  • जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी पद के लिए होना है पेपर।
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
बिहार में अदालत के लिए चपरासी पदों पर चार साल पहले भर्ती निकलने के बाद अब जाकर इसका exam होने जा रहा है, जिसमें एक भयंकर लापरवाही का मामला सामने आया है।
रोहतास जिले के एक परीक्षार्थी को जारी एडमिट कार्ड पर उसकी अपनी फोटो की जगह एक कुत्ते की तस्वीर छाप दी गई है।  
गोल्डन रिट्रीवर ब्रीड के कुत्ते की तस्वीर वाले इस एडमिट कार्ड की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। परीक्षार्थी परेशान है कि इस फोटो से उसे परीक्षा केंद्र पर एंट्री कैसे मिलेगी?
कई बार निवेदन के बावजूद भर्ती परीक्षा बोर्ड ने 13 मार्च तक इसमें सुधार नहीं किया है जबकि एग्जाम 15 मार्च को है।  

पीड़ित परीक्षार्थी ऋतेश कुमार रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेक्ष के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2022 में जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किया था।

आवेदन के समय उन्होंने अपनी सही फोटो अपलोड की थी, जिसकी पुष्टि एक्नॉलेजमेंट स्लिप से भी होती है। 
लेकिन अब चार साल बाद 15 मार्च को इस भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा होनी है और उसके लिए जब उन्होंने एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें उनकी जगह एक कुत्ते की फोटो छपी है।
ऋतेश ने कहा कि इस गलती के कारण इलाके में लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं। उनका परीक्षा केंद्र दूसरे जिले सहरसा में बना है, उन्हें डर है कि एग्जाम में एंट्री नहीं मिलेगी। 
उन्होंने भर्ती बोर्ड से कई बार शिकायत की और एडमिट कार्ड में फोटो सुधारने की मांग की, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
परीक्षा की तारीख नजदीक होने के कारण वे परेशान हैं और चाहते हैं कि जल्द से जल्द गलती ठीक की जाए ताकि वे बिना किसी रुकावट के परीक्षा दे सकें।
यह मामला बिहार में सार्वजनिक परीक्षाओं में लापरवाही और तकनीकी खामियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 
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रोहतास: लॉ कॉलेज हॉस्टल में छात्रा का शव फंदे पर लटका मिला, मीडिया कर्मियों को गेट पर ही रोका

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लॉ कॉलेज से बाहर निकलते एसपी व अन्य पुलिस कर्मी, मीडिया को कॉलेज ने कवरेज के लिए अंदर नहीं घुसने दिया।
  • रोहतास के नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की घटना।
  • लॉ फाइनल ईयर की छात्रा का हॉस्टल में लटका मिला शव।
  • कॉलेज ने मीडिया को प्रवेश नहीं दिया, सुसाइड का मामला बताया।

सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव

पटना के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत का मामला अब तक सुलझा नहीं है और अब रोहतास जिले में एक और ऐसी ही घटना सामने आई है।

रोहतास जिले में लॉ की एक छात्रा की कॉलेज कैंपस में संदेहास्पद स्थिति में 12 मार्च को मौत हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

यह घटना जिले के डेहरी क्षेत्र के जमुहार स्थित नारायण मेडिकल हॉस्पिटल एंड हॉस्पिटल में हुई। मरने वाली छात्रा कैमूर जिले की है और उसका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे पर लटका मिला।

सूचना मिलते ही रोहतास के एसपी रौशन कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। एसपी के निर्देश पर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं।

बताया जा रहा है कि छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। हालांकि उसमें क्या लिखा है, इसका खुलासा अभी पुलिस ने नहीं किया है।

इस घटना की कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों को कॉलेज परिसर के अंदर जाने से रोक दिया गया। कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई घंटों तक पत्रकारों को गेट के बाहर ही रोके रखा और किसी को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी।

अब तक कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

रोहतास एसपी रौशन कुमार ने बताया कि

“छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। घटनास्थल से सुसाइड नोट मिला है, परिजनों का बयान भी लिया जा रहा है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से छानबीन में जुटी हुई है।”

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