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Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?

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भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
  • अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।

नई दिल्ली |

भारत और ब्राजील ने महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ मृदा (rare earths) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इन प्राकृतिक संसाधनों की खरीद के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में इस समझौते (Memorandum of Understanding) के जरिए भारत को ब्राजील के रूप में नया आयातक मिलेगी जो उसकी चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। यह समझौता ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के भारत दौरे के दौरान 21 फरवरी को हुआ।

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

इस समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को विश्वास का प्रतिबिंब बताया है। जबकि राष्ट्रपति लुला (Lula da Silva) ने कहा कि इस समझौते से ब्राजील के खनिज भंडार के उपयोग में वृद्धि हो सकती है, जो अभी सिर्फ 30% ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स) का इस्तेमाल हरित ऊर्जा, EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए जरूरी है। भारत अपनी खनिज जरूरत का 95% हिस्सा आयात करता है। दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पूरी दुनिया के उत्पादन का 90 फीसदी से अधिक हिस्से का नियंत्रण चीन के पास है। ऐसे में इस MoU से भारत को वैकल्पिक स्रोत मिलेगा, जो भू-राजनीतिक जोखिम कम करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खनिज खरीद में तत्काल बड़ी कमी नहीं आएगी लेकिन आने वाले 3 से 5 साल में चीन पर निर्भरता 20 से 30% तक घट सकती है।

भारत व ब्राजील के बीच हुआ समझौता।

MoU साइन होने के दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति व भारतीय पीएम।

समझौते की डिटेल जानिए 

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, ब्राजील के साथ हस्ताक्षर किया गया MoU, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

1- अनछुए खनिज खोजने में भारतीय कंपनियां मदद कर सकेंगी –   अनछुए खनिज भंडार का पता लगाने में (Exploration) भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। लुला ने कहा कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता से ब्राजील के 70% अनछुए भंडारों का फायदा उठाया जा सकता है। ब्राजील के अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके (Unused) खनिज भंडार – नीओबियम, लिथियम व आयरन (Iron Ore) से जुड़े हैं।

2- लौह अयस्क के लिए बनेगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन – भारत-ब्राजील के संयुक्त उद्यम के जरिए लौह अयस्क का खनन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए भारत में लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादक NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), ब्राजील की Vale और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच एक त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो $500 मिलियन का है। इसके जरिए लौह अयस्क या आयरन ओर की ब्लेंडिंग फैसिलिटी के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा।

3- भारतीय कंपनियों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट मिलेंगे – भारतीय निवेशकों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी। और ब्राजील को भारत में तकनीकी निवेश मिलेगा।


समझौते पर आगे की राह

भारत-ब्राजील के बीच का यह एक गैर-बाध्यकारी MoU है, जो व्यावहारिक सहयोग के लिए रोडमैप देता है। इससे आगे जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स बनेंगे, जो मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स और विदेश मंत्रालय के तहत काम करेंगे।

गौरतलब है कि 2023 में भारत ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ के तहत लक्ष्य रखा था कि वह साल 2030 तक इन आवश्यक खनिजों का 50% उत्पादन घरेलू स्तर पर करेगा।


By <a href="//commons.wikimedia.org/wiki/User:RCraig09" title="User:RCraig09">RCraig09</a> - <span class="int-own-work" lang="en">Own work</span>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=148115012">Link</a>

आवश्यक खनिज की जितनी ज्यादा आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन के चलते उतनी ही तेजी से इनके अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो गया है। (साभार – विकिमीडिया)

भारत की चीन पर निर्भरता कितनी ?

  • भारत अपनी रेयर अर्थ्स की जरूरत का 95 से 100% हिस्सा चीन से खरीदता है, यानी पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
  •  ग्रेफाइट का 80%, लिथियम का 60-70% हिस्सा चीन से खरीदा जाता है।
  • 2025 में भारत ने चीन से 1.5 अरब डॉलर के मिनरल्स आयात किए।

चीन के अलावा किससे होता है आयात

  • लिथियम का आयात ऑस्ट्रेलिया व चिली से।
  • कोबाल्ट का आयात कांगो व इंडोनेशिया से।
  • निकेल के लिए भारत चीन के अलावा इंडोनेशिया पर निर्भर।

भारत को इतने खनिज की आखिर क्या जरूरत?

क्रिटिकल मिनिरल या आवश्यक खनिज का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा (मिसाइल्स) व फार्मा के क्षेत्र में होता है। बैटरी बनाने में 70% आवश्यक खनिज इस्तेमाल होता है।

1- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण : 

भारत में बढ़ती बाइक-कारों की मांग, मंहगे होते पेट्रोल-डीजल व बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों का 30% इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ज्यादा आवश्यक खनिज चाहिए। 

2- सोलर और विंड एनर्जी :

कोयले पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बनाने का लक्ष्य है। अभी इसकी दक्षता लगभग 200 GW है। 

3- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र :

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, LED लाइट, सेमीकंडक्टर चिप्स में रेयर अर्थ लगते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $300 बिलियन तक ले जाना चाहता है। डिजिटल इंडिया, AI व 5G जैसे क्षेत्र बिना क्रिटिकल मिनरल्स के नहीं चल सकते। 

4- रक्षा (मिसाइल्स, एयरोस्पेस):

टाइटेनियम, टंगस्टन व रेयर अर्थ्स के जरिए मिसाइल, फाइटर जेट, रडार व सैटेलाइट बनते हैं। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मिनरल्स की आवश्यकता है वरना विदेशी निर्भरता कम नहीं होगी।  

5- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां):

भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक है। कुछ रेयर अर्थ और मिनरल कैटेलिस्ट के रूप में दवा बनाने में मदद करते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ती है और शुद्धिकरण में इस्तेमाल होते हैं। ये मिनरल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण हैं।

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टूटने की कगार पर सीज़फायर : लेबनान पर इजरायली बमबारी के बाद ईरान ने ‘होर्मुज़’ को फिर किया बंद

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लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।
लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।

नई दिल्ली | अमेरिका-ईरान की बीच बुधवार की सुबह हुआ संघर्ष विराम रात होते-होते खत्म होता नज़र आ रहा है। बुधवार की देर शाम को इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई बमबारी की है, जिसके बाद ईरान ने सीज़फायर न मानने की धमकी दी है। ईरानी मीडिया ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित रास्ते को बंद कर दिया है जिसे सुबह सीज़फायर समझौते के तहत खोला गया था।

खबरों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने बेरूत में महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि सीज़फायर की शर्तों के तहत इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि

“अगर राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल के जरिए लेबनान पर हमले जारी रखते हैं, तो यह संघर्ष विराम प्रभावी नहीं रहेगा।”

होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से बंद

इस बीच ईरान की ‘फार्स न्यूज़’ ने रिपोर्ट किया है कि शांति वार्ता के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जिस सुरक्षित समुद्री रास्ते को व्यापार के लिए खोला गया था, उसे ईरानी सेना ने दोबारा बंद कर दिया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

‘हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा’ – IDF 

इजरायली रक्षा बल (IDF) के प्रवक्ता ने एक वीडियो बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल का सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा क्योंकि यह “इजरायली सभ्यता के अस्तित्व को बचाने” के लिए अनिवार्य है।

पाकिस्तान ने की शांति की अपील

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष क्षेत्र से सीज़फायर के उल्लंघन की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और समझौते का सम्मान करने की अपील की है।

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ताइवान की मुख्य विपक्षी नेता चीन पहुंचीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हो सकती है मुलाकात

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नई दिल्ली | ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी की नेता छह दिन के चीन दौरे पर हैं, जिसकी दुनिया भर में चर्चा है। इस दौरे के दौरान उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होने की संभावना है।

ताइवान में कुओमिन्तांग (KMT) पार्टी मुख्य विपक्षी दल है और चेंग ली-वुन को पिछले साल इसका अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने मीडिया को बताया कि

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से उन्हें दौरा करने का निमंत्रण मिला था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। वे “शांति के लिए एक पुल” का काम करेंगी।”

खास बात यह है कि चेंग पिछले एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली केएमटी (KMT) की पहली वर्तमान अध्यक्ष हैं।

बता दें कि चीन के ताइवान की वर्तमान सरकार के साथ तनावपूर्ण रिश्ते हैं। ताइवान में अगला आम चुनाव 2028 में होना है।

विपक्षी नेता चेंग के बीजिंग दौरे को लेकर ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी (DPP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चेंग का रवैया बीजिंग के प्रति “दब्बू” जैसा है और उनकी यात्रा पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण होगा।

दरअसल, स्वशासित ताइवान को चीन अपना ही एक हिस्सा मानता है। चीन कहता है कि ताइवान अंततः उसका ही हिस्सा बनेगा। साथ ही चीन इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार भी नहीं करता है।

ताइवान में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) की 2016 में सरकार बनी, तब से यहां की सरकार चीन को “क्षेत्रीय शांति भंग करने का मुख्य दोषी” बताती आई है।

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अमेरिका-ईरान सीज़फायर : ईरान की वे शर्तें क्या हैं, जिन पर ट्रंप विचार करने को राजी हो गए?

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नई दिल्ली |  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीज़-फायर (संघर्ष विराम) पर सहमति बन गई है। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद हुआ है।

इस तरह ट्रंप ने अपनी उस ‘विनाशकारी’ धमकी को फिलहाल टाल दिया है जिसमें उन्होंने “एक पूरी सभ्यता को नष्ट” करने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान के भेजे शांति प्रस्ताव पर विचार करेंगे। ईरान ने भी इस बात का उल्लेख करते हुए सीज़ फायर पर सहमति दे दी है।

ईरान ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए एक 10-सूत्रीय प्लान (10-point Peace Plan) पेश किया है। ट्रंप ने इसे “काम करने लायक आधार” (Workable basis) बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने आधिकारिक बयान में कहा-

“संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवादों के लगभग सभी विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बन गई है, लेकिन दो सप्ताह का समय इस समझौते को अंतिम रूप देने और इसे पूर्ण रूप से लागू करने की अनुमति देगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

ईरान की दस शर्तों वाला शांति प्रस्ताव 

ईरान की ओर से पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को भेजे गए दस बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव की आधिकारिक डिटेल सामने नहीं आई हैं लेकिन ईरानी मीडिया के हवाले से इन दस बिंदुओं पर पश्चिमी मीडिया व पश्चिम एशिया में रिपोर्टिंग हो रही है। इसके बिंदु इस प्रकार है-

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़

1- ईरानी निगरानी में होर्मुज़ खुलेगा : इस जलमार्ग को ईरान खोलेगा लेकिन इसका प्रबंधन ईरानी सेना के समन्वय में ही होगा।

2- आक्रामकता खत्म हो – सभी प्रकार की आक्रामक कार्रवाइयों को स्थायी रूप से बंद किया जाए।

3- सभी बैन हटाए जाएं : अमेरिका को ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंध (Primary & Secondary Sanctions) हटाने होंगे।

4- ईरान के खिलाफ प्रस्ताव खत्म हों : सुरक्षा परिषद (Security Council) के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (IAEA) के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना।

5- परमाणु कार्यक्रम को मान्यता: ईरान की मांग है कि अमेरिका उसके यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को स्वीकार करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व ईरानी सुप्रीम लीडर।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व ईरानी सुप्रीम लीडर।

6- सैन्य वापसी: पश्चिम-एशिया के देशों में मौजूद अमेरिकी लड़ाकू विमानों और सैन्य बलों की वापसी की शर्त शामिल है।

7- फ्रीज़ संपत्ति रिलीज़ हों: यह भी शर्त है कि विदेश में ईरान की सभी फ्रीज़ संपत्तियों (Frozen Assets) को तुरंत रिलीज किया जाए।

8- मुआवजे की मांग: युद्ध और प्रतिबंधों से हुए नुकसान के लिए ईरान को पूर्ण हर्जाना दिये जाने की शर्त शामिल है।

9- सुरक्षा की गारंटी: भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की लिखित गारंटी मिलने की शर्त भी है।

10- लेबनान और सहयोगियों पर हमले का अंत: इज़रायल और अमेरिका द्वारा लेबनान और अन्य ईरानी सहयोगियों पर हमलों को रोकना भी प्रमुख शर्त है।

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